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आध्यात्मिकता का मतलब भौतिक सुख का त्याग नहीं

Thu, 01 Jan 2015 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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सैफई महोत्सव के पंडाल में गुरुवार को ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ने ‘खुशियों भरा जीवन, सबकी चाह, एक प्रयास’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका उद्घाटन रिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर टी प्रभाकर ने किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत स्वागतगान से हुई। ब्रह्मकुमारी बहनों ने अतिथियों का तिलक किया। ब्रह्मकुमारी निधि के निर्देशन में कला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। पैरामेडिकल महाविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग की शिवा सिंह, ज्योति यादव, कंचन दीक्षित, प्रिया, रिचा, प्रियंका ने गणेश वंदना पर नृत्य प्रस्तुत किया।

इसके बाद सिद्धि अग्रवाल ने नृत्य प्रस्तुत किया। डॉ. सूरज व डॉ. नेहा ने भी प्रस्तुतियां दीं। मुख्य वक्ता खालसा डिग्री कालेज लुधियाना की प्रोफेसर डॉ. बीके सीमा व दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर बीके संजीव ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी को आसान बनाने की जरूरत है। इसके लिए उन्होंने व्यवहारिक टिप्स भी दिए।
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उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता का अर्थ संसार अर्थात भौतिक सुखों से परे रहना नहीं है बल्कि सांसारिक एवं भौतिक सुखों के साथ बेहतर तालमेल एवं जीवन को सही तरीके जीना है। उन्होंने कहा कि बच्चों से उल्लासपूर्ण, सकारात्मक एवं ऊर्जामय जीवन जीने की कला को आसानी से सीखा जा सकता है।

रिम्स के प्रशासनिक अधिकारी/कार्यक्रम संयोजक केबी अग्रवाल ने कहा कि व्यक्ति की सोच ही बीमारी का कारण है। निस्वार्थ प्रेम ही दिल की सर्वोत्तम दवा है। योग, ध्यान से सफल जिंदगी जी जा सकती है। इस मौके पर मृदुला, डॉ. रमाकांत यादव, गीता प्रभाकर, राधाकृष्ण सिंह, रजिस्ट्रार श्रीचंद्र वर्मा, बीके पूनम एवं विनय भाई मौजूद रहे।
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