इटावा। अधिकारियों की ढिलाई के चलते एक महीने बाद भी गोशालाओं में चारे के खर्च के ऑडिट का काम पूरा नहीं हो पाया है। 10 गोशाला संचालक दस्तावेज नहीं आ रहे हैं। ऑडिटर के रिमाइंटर पर मंगलवार को सीवीओ ने गोशाला संचालकों को पत्र जारी किया है।
जिले में 31 अस्थायी गोशाला और सात कांजी हाउस संचालित हैं। इसमें दो करीब तीन महीने से बंद हैं। ग्रामीण गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी प्रधान/पंचायत सचिव और नगरों में ईओ की है। इन आस्थायी गोशाला में 2 करोड़ 18 लाख रुपये चारा और भूसा पर खर्च किए जा चुके हैं।
ईओ और प्रधान अपने ऊपर करीब 25 लाख रुपये भूसे का कर्ज बता रहे हैं। करीब ढाई करोड़ का भूसा खाने के बाद भी गोशालाओं में गोवंश मर रहे हैं।
ज्यादातर गोवंश बहुत कमजोर हो चुके हैं।
गोशालाओं में चारा के गोलमाल की शिकायतें शासन तक भी पहुंचीं। शासन ने करीब डेढ़ महीने पहले सभी गोशालाओं में चारा पर हुए खर्च का ऑडिट कराने का आदेश दिया था।
पिछले महीने की 20 तारीख के बाद ऑडिट के लिए अलग-अलग तारीखों पर गोशाला संचालकों को चारे के खर्च के रजिस्टर के साथ बुलाया गया था। तारीख बढ़ाकर 24 कर दी गई।
गोशालाओं का ऑडिट तो पूरा हो गया, लेकिन बढ़पुरा ब्लॉक की कांधनी, मानिकपुर विसू, जसवंतनगर ब्लॉक की नगला तौर, नगला रामसुंदर, नगला सलहदी, ताखा ब्लॉक की मुर्चा, टकपुरा, मौहरी, भरथना ब्लॉक की कंधेसी धार और कंधेरी पचार के संचालक अभी तक रजिस्टर आदि लेकर ऑडिटर के पास नहीं पहुंचे हैं।
इस पर सहायक लेखा परीक्षक जितेंद्र कुशवाहा ने 22 नवंबर को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को पत्र भेजा है। इसमें संबंधित गोशाला संचालकों को बुलाने के लिए कहा गया है। इसके पहले सहायक लेखा परीक्षक ने कई बार मौखिक भी कहा था। इस पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने गोशाला संचालकों को फोन कर ऑडिट कराने को कहा लेकिन संचालक नहीं आए। अब मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने 26 नवंबर को 10 गोशाला संचालकों को पत्र जारी कर ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। इस
संबंध में सीवीओ डॉ. डीएस राजपूत ने कहा कि ऑडिट चल रहा है।