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बच्चों के भविष्य का ‘उजाला’ बने ‘प्रकाश’

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लखना में इंटरमीडिएट बच्चों की क्लास पढाते नेत्रहीन प्रकाश सोनी - फोटो : ETAWHA
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इटावा। लखना कस्बे के रहने वाले प्रकाश सोनी एक ऐसे शख्स हैं जिनकी खुद की जिंदगी में जब अंधियारा आया तो आंसुओं की बाढ़ भी उनके नैनों में बसे सपनों को डिगा नहीं सकी। आज भले ही उनकी दोनों आंखें दुनियां न देख सकती हों लेकिन उनके दिखाए रास्तों पर बड़े, बड़े अफसर और डॉक्टर चल पड़े हैं।
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हम बात कर रहे हैं कस्बे के मान खां मुहाल (किदवई नगर) निवासी 57 साल के शिक्षक प्रकाश सोनी की। उनका जीवन संघर्ष प्रेरणा से कम नहीं है। स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामसिंह सोनी के बेटे प्रकाश ने एक होनहार विद्यार्थी जीवन बिताया है। वर्ष 1984 में उन्होंने कानपुर के एचबीटीआई से सिविल इंजीनियरिंग की।
चार सालों की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भविष्य के सपने संजोए। इसी दौरान प्रकाश की दोनों आंखों की रेटिना सुकड़ने लगीं। दिल्ली से चेन्नई तक डॉक्टरों को दिखाया पर आंखों की रोशनी नहीं बच सकी। मात्र 23 वर्ष की उम्र में दो मई 1992 को आखिरी बार दुनिया दिखा आंखों की रोशनी चली गई।
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हाथ कब एहसासों का जरिए बन गए उन्हें पता ही नहीं चला। लेकिन प्रकाश सोनी ने हिम्मत नहीं हारी। वह अपनी पढ़ाई को व्यर्थ नहीं जाने दे सकते थे। उन्होंने बच्चों के भविष्य को संवारने की ठानी। इसमें उनका साथ उनकी पत्नी विजय लक्ष्मी ने दिया।
किराये पर लिया चार कमरों का स्कूल
1993 में लखना के राजा रविशंकर शुक्ल से प्रकाश सोनी ने रानी साहिबा का बड़ा अहाता में चार कमरों की बिल्डिंग किराये पर ली और उसमें कक्षा छह से आठ तक का स्कूल खोला। प्रकाश बच्चों को अपना पसंदीदा सब्जेक्ट मैथ पढ़ाने लगे।
बीएड पास विजय लक्ष्मी दूसरे विषय बच्चों को पढ़ातीं थीं। प्रकाश बच्चों को मन लगाकर पढ़ाते, बच्चों का हर सवाल उनकी हिम्मत का ही जवाब था कि 1997 में कुछ दूर पर कक्षा एक से पांच तक का स्कूल भी खोल लिया। वह कस्बे में मास्टर जी कहलाने लगे।
वह बच्चों का साथ आगे की पढ़ाई में भी देना चाहते थे इसलिए 2014 तक कक्षा एक से 12 तक रॉयल सीनियर सेकेंडरी नाम से स्कूल चलाने लगे। प्रकाश सोनी की ही मेहनत है कि उनके पढ़ाए बच्चे आज डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अफसर हैं।
प्रकाश कहते हैं कि वह गरीब बच्चों से फीस नहीं लेते हैं। वह कस्बे के बच्चों का भविष्य संवारना चाहते हैं। आज उनके स्कूल में 16 लोगों का स्टाफ है। प्रकाश और विजय लक्ष्मी आज भी पढ़ाते हैं।
प्रकाश सोनी के दो बच्चे हैं। बेटा उज्जवल प्रकाश जेएनयू दिल्ली में पढ़ रहा है। वह साथ ही आईएएस की तैयारी भी कर रहा है। बेटी ज्योत्सना दिल्ली में केनरा बैंक में शाखा प्रबंधक है।
अंग्रेजी के ख्यातिलब्ध लेखक जॉन मिल्टन की किताब ऑन हिज ब्लाइंडनेस को पसंदीदा बताने वाले प्रकाश इस समय बच्चों को बोर्ड की परीक्षा की तैयारी करा रहे हैं। वह खुद छह से सात घंटे बच्चों को पढ़ाते हैं। एक सहायक उनकी मदद करता है।
उनके पढ़ाए कुछ बच्चे जो अब उच्च पदों पर
आलोक द्विवेदी डॉक्टर, डॉ. अन्नया श्रीवास्तव, पारस वर्मा (स्टेशन मास्टर), सुजाता चौधरी पीसीएस, अरविंद पोरवाल (इंजीनियर एनटीपीसी), पूजा यादव (अवर अभियंता), नवीन त्रिपाठी (पीसीएस) पूनम (समीक्षा अधिकारी, सचिवालय) आदि को प्रकाश सोनी ने पढ़ाया है।
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