दस महीने की कवायद के बाद आखिरकार बिजली विभाग ने पालिका को सबमर्सिबल पंपों के लिए कनेक्शन लेने के लिए तैयार कर लिया है। पालिका ने न केवल कनेक्शन चार्ज के लिए 14 लाख रुपये जमा कर दिए है बल्कि कई सालों से बकाया राशि में से 25 फीसदी का भुगतान भी कर दिया है। हालांकि सांसद और विधायक की निधियों से लगाए गए 75 सबमर्सिबल पंपों को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
पालिका हैंडओवर न होने का बहाना लेकर अभी भी उक्त पंपों को अपना मानने के लिए तैयार नहीं है। दूसरी ओर बिजली विभाग भी हार मानने के लिए तैयार नहीं है। करीब दस माह पहले बिजली विभाग ने शहर में चोरी की बिजली से चल रहे 435 सबमर्सिबल पंपों को पकड़ा था।
इनमें से 360 तो पालिका के थे जबकि 75 सांसद तथा विधायक निधि से लगवाए गए। बिजली विभाग ने पिछले तीन सालों के भीतर हुई बिजली की खपत का आंकलन करते हुए 4.75 करोड़ का बिल पालिका को थमा दिया था। इसके बाद दोनो विभागों के बीच विवाद की स्थित उत्पन्न हो गई थी और विवाद जिलाधिकारी कार्यालय की दहलीज तक पहुंच गया था।
आखिरकार विद्युत विभाग पालिका को अपनी बात मनवाने में कामयाब हो गया है पालिका ने 360 कनेक्शन लेने के लिए 14 लाख जमा करा दिए है तथा 4.75 करोड़ में से 2.00 करोड़ रुपये भी जमा करा दिए हैं। बिजली विभाग ने 100 सबर्सिबल कनेक्शन पर मीटरिंग का काम भी पूरा कर दिया है। अप्रैल के अंत तक सभी सबमर्सिबल पंपों पर मीटर लगाने की बात कही जा रही है।
बिजली विभाग ने चौबीस घंटे में सबमर्सिबल को 8 घ्ंाटे तक चलता हुआ मानते हुए 4.75 करोड़ का बिल पालिका को थमाया था जबकि पालिका ने अपने आंकलन में माना है कि उक्त सबमर्सिबल केवल दो घंटे ही चलते हैं। इसी को आधार मानकर पालिका ने 25 भुगतान कर दिया है।
जबकि बिजली विभाग अभी भी अपनी बात पर अड़ा हुआ है। इसी प्रकार पालिका का कहना है कि सांसद, विधायक की निधि के सबमर्सिबल अभी तक उसे हैंडओवर ही नहीं हुए है तो वो बिल अदा क्यो करें। जबकि बिजली विभाग का तर्क है कि जो लोग पानी का उपयोग कर कर रहे है वे जलकर तो पालिका को ही अदा कर रहे है इसलिए बिल अदा करने की जिम्मेदारी से पालिका बच नहीं सकती।
40 सबमर्सिबल पंपों पर दबंगों का कब्जा
शहर में पेयजल की समस्या को देखते हुए विभिन्न वार्डों में सांसद तथा विधायक निधि से 75 सबमर्सिबल पंप लगवाए गए हैं। ये पंप अभी तक पालिका को हैंडओवर नहीं किए गए हैं। पालिका भी दबी जबान यह मान रही है कि शहर में 40 से अधिक सबमर्सिबल पंपों पर दबंगों का कब्जा है। कई दबंगाें ने तो सबमर्सिबल पंपों को चहारदीवारी में घेर लिया है। सरकार का पैसा खर्च होने के बाद भी सार्वजनिक उपयोग नहीं हो पा रहा है।