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जहां रामलला विराजमान, वहीं जन्मभूमि : वेदांती

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श्रीराम विजय यात्रा के समापन पर संबोधन करते मुख्य अतिथि डा.राम विलास वेदांती - फोटो : ETAWHA
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इटावा। जहां रामलला विराजमान हैं, वहीं श्रीराम का मंदिर है। खुदाई में मिलीं मूर्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि वहां मंदिर ही था। नासा ने भी इस बात को माना है। 17 नवंबर के पहले कोर्ट से श्रीराम मंदिर के पक्ष में फैसला आ जाएगा। ये बातें श्रीराम जन्मभूमि न्यास समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राम विलास वेदांती ने श्रीराम विजय यात्रा कार्यक्रम में कहीं।
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मंगलवार को हिंदू सेवा समिति की ओर से निकाली गई श्रीराम विजय यात्रा में शामिल होने आए पूर्व सांसद वेदांती ने कहा कि 2001 में नासा के उपग्रह ने विवादित स्थल के नीचे शंकरजी होने की जानकारी दी थी। खुदाई के दौरान भी
देवी-देवताओं की मूर्तियां मिलीं।
किसी मस्जिद के नीचे देव प्रतिमाएं नहीं मिलतीं। अयोध्या मंदिर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 18 अक्तूबर तक पूरी होनी है। 17 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उससे पहले निर्णय आ जाएगा।
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वेदांती ने कहा कि सरकार बनने के बाद मोदी ने कह दिया था कि पहले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए हटेगा, फिर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाएगा। इसके बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बनेगा। जिस तरह त्रेता में श्रीराम और लक्ष्मण ने रावण का अंत किया था, उसी तरह कलयुग में मोदी और शाह ने अनुच्छेद 370 और 35 का अंत कर दिया है। अब जनसंख्या नियंत्रण कानून बनना जरूरी है।
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क्योंकि वर्ग विशेष के लोगों की जनसंख्या बढ़ रही है। देश में कुछ कट्टरवादी लोग हैं और एक नहीं चार चार शादी करते हैं। शादी करके तलाक दे देेते हैं।
अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष एवं सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि अगले साल इससे भी बड़ी विजय यात्रा निकाली जाएगी।
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