निवाड़ीकला। समय के साथ साथ चुनाव में नेताओं की पोशाकें बदलने लगी हैं। पहले नेताओं की पहचान ही खादी के कपड़ों से होती थी। अब ज्यादातर जनप्रतिनिधि खादी के कपड़ों में नजर नहीं आते हैं। खादी की जगह अब स्टाइलिश चिकन और कॉटन के कपड़ों ने ले ली है। इस चुनाव में खादी की बिक्री घटी है।
चुनाव प्रचार के दौरान खास ध्यान पहनावे पर भी रखा जा रहा है। यही वजह है कि नेताजी का पारंपरिक से लेकर आधुनिक पहनावा जनता के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहा है। नेताजी कभी कोट-पेंट तो कभी सफारी सूट या कुर्ता-पायजामा पहनकर प्रचार कर रहे हैं। नेता जी के सिर पर पार्टी की टोपी और आस्था से जुड़ा पटका पड़ा रहता था। एक दौर था जब कुर्ता, धोती, सदरी और बड़ी मोहरी के पायजामे नेता पहनते थे। वक्त के साथ मोहरी न के बराबर हो गई है। चूड़ीदार पजामी ने जगह बनाई है। अब पेंट स्टाइल पायजामा नेताओं की खासी पसंद बना हुआ है। कुर्ता और पेंट का चलन भी जोर पकड़ रहा है ।
इटावा। खादी के कपड़ों की डिमांड चुनाव दर चुनाव घटती जा रही है। लोकसभा चुनाव की तुलना में खादी की मांग इस विधानसभा चुनाव में आधी रह गई है। जिला पंचायत कार्यालय चौराहे पर स्थित श्री गांधी आश्रम खादी भवन के प्रबंधक सुभाष चंद्र सिंह ने बताया 2019 लोकसभा चुनाव की अपेक्षा इस साल विधानसभा चुनाव में उतना व्यापार नहीं है। जिले में कुल 14 से 15 खादी की दुकानें हैं। आम दिनों की तुलना में चुनाव के दौरान खादी की थोड़ी डिमांड बढ़ी है। चुनाव से पहले रोज 20 से 25 हजार का व्यापार हो रहा था, लेकिन अब लगभग 40 हजार रुपये प्रतिदिन की बिक्री हो रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान यही बिक्री लगभग 80 हजार रुपये प्रतिदिन होती थी। उधर, महेवा खादी भंडार विक्रेता आलोक गुप्ता कोई जानकारी नहीं दे सके। खादी पर मिल रही छूट के बारे में भी उनके पास जानकारी नहीं थी।