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Etawah News: सियासत, प्रेम और बलिदान पर कवियों ने छेड़े सुर

Thu, 01 Oct 2026 11:28 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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फोटो 10:: कवि सम्मेलन में कविता का गायन करते कवि। स्रोत-आयोजक
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इटावा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के तत्वावधान में लखना में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश उपाध्यक्ष एमपी सिंह तोमर, डॉ. एके शर्मा, गोपाल सारस्वत और जिलाध्यक्ष संतोष सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम संयोजक सुनीत सिंह चौहान ने सभी अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत कवयित्री भूमिका जैन की सरस्वती वंदना से हुई। यशपाल यश फिरोजाबाद ने अपनी रचना में सामाजिक सद्भाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हवा सद्भाव की अब गांव में आने नहीं देती...। यशपाल ने सियासत पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, सियासत रोटियां दो चैन से खाने नहीं देती...। कवि सतीश मधुप घिरोर ने बलिदानी सैनिक की पत्नी के मार्मिक उद्गार सुनाए। उन्होंने अपनी कविता में कहा, अमर हुए सैनिक की पत्नी, विधवा नहीं हुआ करती...।

कवयित्री भूमिका जैन ने अपनी रचना में मन की साधना का गीत सुनाया। उन्होंने प्रेम की संभावना को दर्शाया। भूमिका जैन ने कहा, प्रेम की संभावना का, गीत हूं सुन लीजिए...। कवि रोहित चौधरी इटावा ने अपनी ओजस्वी रचना से राष्ट्रीय भावना जगाई। उन्होंने कहा, वंदे मातरम् होठों पर, और दिल में भारत रखता हूं...।
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जीवन के अनुभव और समकालीन व्यंग्य

कवि पदम अलबेला हाथरस ने जीवन की अनिश्चितता पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ये ज़िंदगी है मौत से बेखौफ लड़ी है...। मोहित सक्सेना आगरा ने व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने अपनी कविता में कुछ तिलचट्टे ऐसी सरकारों के मुंह पे थूक गए... पढ़ा। कवि उमेश द्विवेदी औरैया ने आधुनिक जीवनशैली पर हास्य रचना प्रस्तुत की, जिसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम पर रील बनाने तथा जोमैटो से खाना मंगाने का जिक्र था। इस अवसर पर मेजर पांडेय, उमेश वर्मा, धर्मेंद्र भदौरिया सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
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