पिलखर में दिल दहला देने वाले एक ही परिवार की छह लोगों के हत्यारे को फांसी की सजा से ग्रामीण संतुष्ट और खुश दिखे। सजा होने में आठ साल का समय लगने को कुछ मलाल जरूर है। फैसला आने के बाद गांव के लोग 27 मई की उस काली रात की चर्चा करते रहे।
27 मई 2012 की उस भयानक रात की यादें गांव के लोगों की आज भी रोंगटे खड़े कर देती हैं। उस रात सुरेश चंद्र यादव, उनकी पत्नी विमला देवी, बेटा अवनीश और तीन बेटियों रश्मि, सुरभि व श्वेता की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई थी।
रामप्रताप उर्फ टिल्लू यादव के पड़ोसी रामबाबू ने कहा कि छह लोगों की हत्या से गांव ही नहीं पूरा जिला दहल गया था। हत्यारे को फांसी से कम सजा मिलनी ही नहीं चाहिए थी। फैसला देरी से आया, लेकिन सही आया है।
गांव के कल्लू यादव ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराध के लिए फांसी की सजा भी कम है, लेकिन इससे बड़ी कोई सजा कानून में है भी तो नहीं।
जिनसे जमीन के लिए अपना पूरा परिवार खत्म कर दिया, उसे कुछ दिन में ही फांसी की सजा हो जानी चाहिए थी, आठ साल का लंबा इंतजार नहीं होना चाहिए था।
कुछ अन्य ग्रामीणों ने न्यायालय के फैसले पर खुशी जताई लेकिन अपना नाम बताने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि न्यायालय का फैसला आने में देरी तो हुई लेकिन सही फैसला आया है।
पिलखर हत्याकांड में टिल्लू को सजा दिलवाने में 11 गवाहों के साथ घटनास्थल के सबूत भी अहम रहे हैं। सरकारी वकील ने बताया कि वारदात में प्रयुक्त कुल्हाड़ी के अलावा सबूत के तौर पर खून लगा ताला, तौलिया का टुकड़ा, खून से सनी मिट्टी, मटमैले कपड़े, खून लगा कुंडल, एक रोटी का टुकड़ा, लड्डू, कचौड़ी और शराब के तीन खाली क्वार्टर शामिल रहे हैं। संवाद