‘फिजियोथेरेपी चिकित्सा विज्ञान की एक महत्वपूर्ण ब्रांच के रूप में स्थापित हो चुकी है। सामान्य बीमारियों के अलावा दुर्घटना एवं गंभीर चोटों के मरीजों को ठीक करने में इसकी भूमिका अहम है।’
यह बात उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (रिम्स) सैफई के निदेशक डा. टी प्रभाकर ने कही। वह शनिवार को रिम्स की ओर से संचालित पैरामेडिकल विज्ञान महाविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग में दो दिवसीय कार्डियो-पल्मोनरी फिजियोथेरेपी विषय पर हुई कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्डियो-पल्मोनरी फिजियोथेरेपी पर आधारित इस कार्यशाला से आईसीयू में भर्ती मरीजों एवं कार्डियो-पल्मोनरी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को पूरी तरह स्वस्थ करने में बहुत मदद मिलेगी।
कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक डा. वीपी गुप्ता, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली ने प्रतिभागियों को आईसीयू, आकस्मिक एवं सामान्य वार्डों में भर्ती मरीजों को इलाज के दौरान सांस लेने में आ रही कठिनाइयों को ठीक करने तथा सामान्य मरीजों के श्वसन तंत्र को बेहतर करने संबंधित जानकारी व प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला में प्रशिक्षकों का मुख्य फोकस मरीजों के श्वसन तंत्र को बेहतर करने व उन्हें कम समय में ही सामान्य जीवन जीने के अतिरिक्त गतिशील कार्य करने योग्य बनाने पर रहा।
फिजियोथेरेपी विभाग के फैकेल्टी मेंबर एवं कार्यशाला संयोजक डा. सूरज कुमार ने बताया कि दो दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पैरामेडिकल छात्र-छात्रओं को कार्डियो-पल्मोनरी फिजियोथेरेपी पर विस्तार से व्यवहारिक जानकारी देना है।
इस मौके पर प्रो अरुण नागरथ, प्राचार्य पैरामेडिकल विज्ञान महाविद्यालय, चिकित्सा अधीक्षक डा. एसके गुप्ता, डीन प्रो. केएम शुक्ला, नेहा रस्तोगी, अंजली अग्रवाल, केबी रंजीत सिंह चौधरी, डा. गौरीशंकर आदि उपस्थित रहे।