चकरनगर। प्रवासी पक्षियों के ठहराव में ध्वनि प्रदूषण की बाधा ने दो किनारों के बीच बसे गांवों की दूरियां बढ़ा दी है। ध्वनि प्रदूषण से सेंच्युरी विभाग को आपत्ति है। इसी वजह से विभाग की रोक से ग्राम पंचायत भरेह के आमदापुर घाट पर पैंटून पुल नहीं बन सका है। इस वजह से करीब 50 गांवों के लोग उस पार जाने के लिए 25 से 30 किलोमीटर का चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
आमदापुर जनपद इटावा में आता है और कैथोली जनपद औरैया में है। दोनों जिलों के बीच आने-जाने का एक बड़ा माध्यम यही पैंटून पुल है। वर्षों पुराना पैंटून पुल इस वर्ष सेंचुरी विभाग की रोक के कारण अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी में पानी उतरते ही दिसंबर महीने में पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया था। पीपे जोड़ने का कार्य पूर्ण होकर एप्रोच बनाई जानी थी तभी सेंच्युरी विभाग के अधिकारियों ने आकर काम रुकवा दिया। दूसरी तरफ की एप्रोच भी तोड़ दी ताकि लोग यहां से पैदल भी गुजर न सकें।
लोगों ने बताया कि रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए उन्हें औरैया के सेंगनपुर ,भीखेपुर के बाजारों से 3 से 5 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। पुल न बनने के कारण कस्बा चकरनगर 25 किलोमीटर चलकर जाना होता है या फिर गढाकास्दा होते हुए बाबरपुर अजीतमल बाजार 30 किलोमीटर का फासला तय करना होता है। औरैया या हाईवे जाने के लिए भी यह लाभदायक था लेकिन अब हमारा समय खराब हो रहा है। सेंच्युरी विभाग के कारण नौका का भी संचालन प्रतिबंधित है। ऐसे में बहुत से दिक्कतों का सामान क्षेत्रीय लोगों को करना पड़ रहा है।
प्रभावित होने वाले गांवों में चकरनगर क्षेत्र के कांयछी, निवी, हरौली ,पहलन पथर्रा, चकरपुरा, भजनपुरा, हरपुरा, अमदापुर, नीमाडाडा, भरेह, महुआ सुडा, आदि शामिल है। गौरतलब है कि 1847 के गदर में रणबांकुरे राजा निरंजन सिंह, राजा रूप सिंह ने रानी लक्ष्मीबाई के दिशा-निर्देशन में इसी घाट पर पैंटून पुल बनाकर औरैया तहसील को लूटा था। अंग्रेजों को करारी शिकस्त दी थी। यमुना नदी के इस पैंटून का जिक्र आजादी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है।
इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी चकरनगर हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि प्रवासी पक्षियों के ठहराव में पुल से गुजरने वाले वाहनों से ध्वनि प्रदूषण के चलते समस्या होती है। वही सेंच्युरी होने के कारण नावों का संचालन भी अवैध है। पैंटून पुल को इसी कारण बंद करवा दिया गया है।