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Etawah News: खेतों में पानी भरते ही धान की रोपाई शुरू

Thu, 06 Jul 2023 12:43 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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- किसानों को है इस बार अच्छी बारिश होने की उम्मीद
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फोटो संख्या 03: खेत में धान की रोपाई करते लोग। संवाद
फोटो संख्या 04: कृषि वैज्ञानिक डॉ.विजय बहादुर जायसवाल। संवाद



संवाद न्यूज एजेंसी

इटावा/ इकदिल। सावन की पहली बारिश के साथ ही पानी से भरे खेतों धान की रोपाई शुरू हो गई है। जनपद में धान का रकवा 50 हजार हेक्टेयर है। लेकिन अभी पूरे तौर पर धान का रोपाई कार्य शुरू नहीं हुआ है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार उपजाऊ मिट्टी में धान की नर्सरी को तैयार होने में 21 से 25 दिन लगते हैं, जबकि ऊसर की मिट्टी में नर्सरी तैयार होने में 30 से 32 दिन का अंतर होता है। जिन किसानों की नर्सरी रोपाई के लिए तैयार होने के बाद रोपाई कार्य शुरू कर दिया है। लेकिन रोपाई कार्य के गति पकड़ने में अभी कई दिन और लग सकते हैं।
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इकदिल के गांव कांकरपुर में मंगलवार की दोपहर हुई तेज बारिश से खेत पानी से भरा देख किसानों के चेहरे खिल गए हैं और उन्होंने धान की रोपाई शुरू कर दी है। रोपाई से पहले किसानों ने खेतों को तैयार कर लिया था।
वह खेत भरने के लिए बारिश का इंतजार कर रहे थे। किसानों का मानना है कि मौजूदा समय में धान की रोपाई के लिए काफी बेहतर समय है। किसान सुशील चौधरी व कमल कुमार ने बताया कि जुलाई में धान की रोपाई के बाद दिसंबर तक सभी प्रजातियों का धान पककर तैयार हो जाएगा। इस बार अच्छी बारिश की उम्मीद है जिससे फसल अच्छी तरह से तैयार हो सके।
धान किसान यह सावधानी बरतें
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.विजय बहादुर जायसवाल ने धान की रोपाई करने वाले किसानों को सलाह दी है कि रोपाई करने से पहले नर्सरी की ऊपर वाली पत्ती को काट कर रोपाई करें। ऐसा करने से पत्तियों के ऊपर कीटनाशकाें का अंडा नष्ट हो जाएगा और फसल में कीटनाशक लगने की चिंता दूर हो जाएगी।
बताया कि रोपाई के बाद नर्सरी दो दिन पानी में रहनी चाहिए। धान में हर समय समय नमी बनी रहनी चाहिए। रोपाई के 20 से 25 दिन बाद किल्ली निकलने पर यदि फसल में तना छेदक रोग लगने पर फसल को रोग लगने से बचाने के लिए यदि जैविक खेनी करने वाले किसान नीम ऑयल का प्रयोग करें। यदि रासायनिक खेती करते हैं तो पोरटेंजी दवा का पांच किलो के हिसाब से प्रति एकड़ दाने डालें।
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फसल को रोग से बचाएं
फसल में खैरा रोग लगने पर फसल में जिंक सल्फेट का 10 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से रोपाई से पहले लगा दें। जिससे फसल को रोग से बचाया जा सके। ध्यान रहे कि जिंक सल्फेट को डीएपी के साथ मिलाकर नहीं डालें। दोनों को अलग- अलग डालें।
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