गेहूं की सरकारी खरीद की अवधि 15 जून को समाप्त हो गई, लेकिन इस बार भी जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। खरीद में लगाई गई सरकारी एजेंसियों में पीसीएफ और खाद्य विभाग को छोड़कर शेष फिसड्डी रहीं। 14 जून तक के खरीद आंकड़ों के मुताबिक जिले में इस बार 45651.60 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया, जबकि लक्ष्य 85 हजार मीट्रिक टन था। जिले में सिर्फ 53.71 फीसदी ही गेहूं खरीदा जा सका।
जिले में गेहूं खरीद के लिए इस बार सरकार ने छह एजेंसियों को जिम्मेदारी दी थी। एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई। शुरुआत में लगभग महीने भर खरीद केंद्रों पर सन्नाटे जैसी स्थिति रही। किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने की बजाय आढ़तियों के पास पहुंचते रहे। हालांकि योगी सरकार ने किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलवाने के लिए मंडियों में हर रोज दो बार गेहूं के रेट निर्धारित करने के लिए नीलामी के आदेश दिए।
मंडी सचिव को इसकी जिम्मेदारी दी। इसका उद्देश्य था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम में खुले बाजार के रेट तय न हों, जिससे कोई किसान क्रय केंद्र पर न भी आए तो भी उसे खुले बाजार में उचित मूल्य प्राप्त हो सके। इसका असर भी क्रय केंद्र की खरीद पर रहा।
गेहूं की सरकारी खरीद के लिए खाद्य विभाग के छह, पीसीएफ के 49, यूपी एग्रो व कर्मचारी कल्याण निगम के तीन-तीन, यूपीएसएस और भारतीय खाद्य निगम के दो-दो केंद्र खोले गए। खाद्य विभाग एवं पीसीएफ को छोड़कर शेष एजेंसियों की खरीद का रिकार्ड दयनीय रहा। चारों एजेंसियां लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसदी भी गेहूं नहीं खरीद पाईं।
क्रय एजेंसियों का लक्ष्य और खरीद (मीट्रिक टन में)
एजेंसी का नाम लक्ष्य खरीद फीसदी
पीसीएफ 36 हजार 26390.50 73.31
खाद्य विभाग 10 हजार 8323.35 83.25
यूपी एग्रो छह हजार 2026.45 33.77
क.क.निगम 11 हजार 1726.35 15.69
यूपीएसएस 10 हजार 1630.95 13.90
भारतीय खाद्य निगम 12 हजार 5554.00 46.28
कुल 85 हजार 45651.60 53.71