इटावा। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम पुरुल श्रीवास्तव ने ट्रेन में यात्रा के दौरान फर्जी टीटी बनकर एक यात्री से दस हजार रुपये लूट लिए जाने के करीब पांच साल पुराने मामले एक को छह साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर चार हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर उसे एक माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पडेगा।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता गौरव दीक्षित ने बताया कि दरभंगा, बिहार के गांव जमालपुर निवासी राज किशोर अपने चचेेरे भाई मनोज कुमार के साथ 31 जुलाई 2017 को तूफान एक्सप्रेस से पटना जा रहे थे। दोनों के पास जनरल टिकट था, लेकिन वह स्लीपर कोच में चढ़ गए। जैसे ही ट्रेन इटावा से रवाना हुई तभी दो लोग उसके पास आए और टिकट देखने लगे। दोनों ने कहा कि उसके पास जनरल टिकट है। उन पर 18 सौ रुपये का जुर्माना लगेगा। राजकिशोर ने कहा कि वह अगले स्टेशन पर उतर कर जनरल कोच में चले जाएंगे। तभी एक सफेद पेंट शर्ट पहने एक युवक आया और खुद को टीटी बताया। टीटी बनकर आए व्यक्ति ने राज किशोर की जेब से दस हजार रुपये लूट लिए। भीड़ में गायब हो गए। राज किशोर ने भरथना स्टेशन पर उतर कर इसकी जानकारी पुलिस को दी।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने लूट की धारा में मामला दर्ज कर लूट करने वालों की तलाश शुरू कर दी। भरथना थाना पुलिस एक सितंबर को गश्त पर थी। तभी मुखबिर ने सूचना दी कि दो युवक रेलवे स्टेशन के पास खड़े हैं। वह चोरी का सामान लिए है। इस पर पुलिस ने दो युवकों को पकड़ लिया। एक युवक ने अपना नाम समर सिंह दोहरे निवासी पनियामऊ थाना भोगनीपुर कानपुर देहात बताया। तलाशी में समर सिंह के पास से मोबाइल, चाकू के अलावा नकदी बरामद हुई। पकड़े गए दूसरे युवक ने अपना नाम प्रशांत कश्यप बताया।
पूछताछ के बाद पुलिस ने प्रशांत को छोड़ दिया। रुपयों के बारे में पूछने पर आरोपी ने बताया कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर ट्रेन से एक व्यक्ति के पास से दस हजार रुपये लूटे थे। पुलिस ने जेल भेज दिया। छानबीन के बाद पुलिस ने समर के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए। सुनवाई विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम की कोर्ट में हुई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों व गवाहों केे आधार पर कोर्ट ने समर को दोषी पााया। दोषी पाए जाने पर कोर्ट ने उसे छह साल के कठोर कारावास की सजा व चार हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर उसे एक माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा। जिला शासकीय अधिवक्ता शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि इस तरह के फैसले से अपराधियों में दहशत का माहौल पैदा हो गया और वह अपराध करने से डरेंगें।