इटावा। घरों में जलापूर्ति के नाम पर किस तरह करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, इसका उदाहरण इकदिल और चकरनगर में मिलता है। यहां करोड़ों से बनी टंकियां शोपीस बनी हुईं हैं। जिले में पूर्व में बनी 91 टंकियों में आधी ऐसी होंगी जो बंद हैं या क्षमता से काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इनके सबके बीच हर घर जल योजना के तहत 86 और पानी की टंकियों के निर्माण की शुरुआत कर दी गई है।
जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना पर जिले में काम शुरू हो गया है। फेस-2 के काम में जिले में 203 करोड़ रुपये से 86 पानी की टंकियों का निर्माण किया जाएगा। अभी 41 टंकियां बनाई जा रहीं हैं। निर्माण की जिम्मेदारी मुंबई की इंडियन ह्ययूमन पाइप कंपनी को दी गई है। काम 2024 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दावा है कि करीब ढाई लाख लोगों को इन टंकियों की मदद से घर में ही साफ पानी उपलब्ध होगा।
केस-1
इकदिल की ग्राम पंचायत चांदनपुर में करीब 10 साल पहले 1.30 करोड़ से दो लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। टंकी से जलापूर्ति शुरू हुई तो पाइप लाइन जगह-जगह फट गई। तब पाइप लाइन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। इस टंकी से सात गांवों को पानी मिलना था, जो आज तक नहीं मिल सका। लोग हैंडपंप के सहारे हैं।
केस-2
चकरनगर ग्राम पंचायत के नौ मजरों को पानी देने के लिए वर्ष 2003 में 1.30 करोड़ से पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। टंकी एक सप्ताह भी नहीं चली और पाइप लाइन फटने के कारण जलापूर्ति बंद कर दी गई। 2005 में मरम्मत पर 1.80 लाख रुपये फिर खर्च हुए लेकिन इसके बाद भी पानी लोगों के घरों तक नहीं पहुंचा। जनवरी 2021 में इसकी फिर मरम्मत कराई गई लेकिन अभी तक लोगों के घरों में पानी की बूंद तक नहीं पहुंची।
बसरेहर में भी संकट
बसरेहर में 2014 में पानी की टंकी का निर्माण हुआ था। इस टंकी पर भी करीब सवा करोड़ रुपये खर्च हुए थे। जलापूर्ति शुरू होते ही आधे गांव में पड़ीं पाइप लाइन जगह-जगह फट गईं। इस कारण टंकी से जलापूर्ति चालू ही नहीं हो सकी। 2021 में इसकी मरम्मत कराई गई। पूरे गांव में पाइप लाइन बिछाई गई। जगह-जगह स्टैंड पोस्ट बनाकर टोंटियां लगाई गईं।
घरों में कनेक्शन भी दिए गए। वर्तमान में कई स्टैंड पोस्ट से टोंटियां या तो खराब हैं या गायब हो चुकी हैं। घरों में भी पूरी क्षमता से पानी नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीण इदरिश खान, नसीर खान, गौरव यादव, विपिन दुबे आदि ने बताया कि जब से टंकी चालू हुई है कुछ दिन ही पानी आया। इसके बाद पूरे दिन में एक घंटे भी पानी नहीं मिलता है। कई जगह तो टोंटियां भी नहीं हैं और जलापूर्ति के समय पानी बहा करता है। कई घरों में तो पानी तक नहीं पहुंचता है।
पूर्व में जो टंकियां बनी थीं, उन्हें फेस-वन में माना गया है। ऐसी टंकियां जिले में 91 हैं। इनमें कुछ बंद हैं तो कुछ प्रधानों की लापरवाही के कारण चालू नहीं हो रही हैं। टंकियां यदि बंद हैं तो इन्हें चालू कराने की जिम्मेदार प्रधानों की है, क्योंकि उन्हें हैंडओवर की जा चुकी हैं। नई टंकियों के निर्माण का काम शुरू करा दिया गया है। फेस-दो में 86 टंकियां बनेंगी। बाकी फेस-3 में काम होगा। - आफताब आलम, अवर अभियंता, जलनिगम।
नौकरी के नाम पर मांग रहे रुपये
हर घर जल योजना के तहत जिन ग्राम पंचायतों में पानी की टंकियां बन रही हैं, वहां के 13 युवाओं को इनके रखरखाव के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऑपरेटर, मैकेनिक, प्लंबर इलेक्ट्रीशियन के दो-दो, राजमिस्त्री के लिए तीन पदों समेत कुल 13 लोगों को प्रशिक्षण देकर इन्हें निशुल्क टूल किट दी जाएंगी। यह लोग अस्थायी होंगे।
प्रधान जरूरत के हिसाब से इनसे काम कराएंगे और ग्राम पंचायत के मद से ही भुगतान करेंगे। सरकार की इस योजना की जानकारी के बाद कुछ दलाल सक्रिय हो गए हैं, जो गांव के लोगों से नौकरी लगाने के नाम पर 10 से 15 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। मामला जलनिगम एक्सईएन तक पहुंचा तो उन्होंने विभागीय कर्मियों व प्रधान के जरिये लोगों को जागरूक करना शुरू किया है।