जिला अस्पताल के सामने खुला जन औषधि केंद्र।
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सीएम योगी के फरमान के बाद जिले में मरीजों को सस्ते दाम पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने की पहल शुरू हो गई है। इसके तहत जिला अस्पताल के सामने एक जन औषधि केंद्र खुल गया है। जबकि कई अन्य आवेदन भी किए गए हैं। एक रुपये में मिलने वाली पैरासिटामॉल टैबलेट इन केंद्रों पर 25 पैसे में मिलेगी। इससे गरीबों को भी काफी राहत मिलेगी।
महंगे इलाज के चलते गरीब और मध्यम वर्ग परेशान है। अब उन्हें राहत देने के लिए मोदी व योगी सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। सीएम योगी घोषणा कर चुके हैं कि यूपी में जेनरिक दवाओं की 3 हजार दुकानें खोली जाएंगी। इस घोषणा पर अमल होना शुरू हो गया है। औषधि प्रशासन विभाग की वेबसाइट एफडीआई डॉट यूपी डॉट एनआईसी डॉट इन पर आवेदन मांगे जा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन के साथ विभाग को हार्ड कॉपी में आवेदन करने के बाद जेनरिक दवाओं का लाइसेंस दिया जा रहा है। जिले में नगर व ब्लाक क्षेत्र में भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जाने हैं। हर ब्लाक में एक केंद्र खोला जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन केंद्रों पर करीब 300 प्रकार की जेनरिक दवाएं उपलब्ध रहेंगी। जिनकी कीमत इसी सॉल्ट कंपोजीशन वाली ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं से बेहद कम होगी। हालांकि गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होगी।
तीन जगहों के लिए आए आवेदन
शहर स्थित जिला अस्पताल के सामने, सिविल लाइन एरिया में और सरसईनावर में भारतीय जन औषधि केंद्र खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं। ड्रग इंस्पेक्टर सुनील कुमार रावत ने बताया कि केंद्र के लिए लोग संपर्क कर रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन के 15 दिन में हार्डकॉपी में आवेदन करने पर नियमानुसार लाइसेंस जारी किए जाएंगे। स्थलीय परीक्षण के बाद विभाग से इन आवेदनों को मंडल स्तर पर असिस्टेंट कमिश्नर के यहां भेजा जाएगा। लाइसेंस शुल्क 3 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इनमें से जिला अस्पताल के सामने एक केंद्र खुल गया है।
सरकारी व प्राइवेट डाक्टरों से होगी पहल
जेनरिक दवाओं से मरीजों को लाभ देने के लिए औषधि प्रशासन विभाग सरकारी व वैध प्राइवेट चिकित्सकों से संपर्क करेगा। ड्रग इंस्पेक्टर श्री रावत ने बताया कि डाक्टरों को जेनरिक दवाएं लिखने के लिए नियमों का पालन करने को कहा जाएगा। उन्हें जेनरिक दवाओं की सूची उपलब्ध करा दी जाएगी। अभी दवाओं का चार्ट उपलब्ध नहीं हुआ है।
ये हैं जेनरिक दवाएं
ड्रग इंस्पेक्टर श्री रावत ने बताया कि जो सॉल्ट बाजार में प्रचलित हैं, वह अभी ब्रांडेड कंपनियों के नाम से उपलब्ध हैं। जिनकी कीमत अधिक है। उन्हीं साल्ट को सरकार मुहैया कराएगी। बेशक दवा पर नाम ब्रांडेड कंपनी का नहीं होगा। लिहाजा वह दवा सस्ती कीमतों पर उपलब्ध हो सकेगी।