फोटो 28:: जिला अस्पताल में मरीज की आंख की जांच करते डाॅ. आनंद उपाध्याय। संवाद
जिला अस्पताल में शुरू हुए आधुनिक विधि से आंखों के ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन कराने आने वाले मरीजों को इंजेक्शन का दर्द, चीरा या टांकों की परेशानी से नहीं जूझना पड़ेगा। अस्पताल में फेको मशीन से ऑपरेशन चिकित्सकों ने इसका उपयोग भी शुरू कर दिया है।
नेत्र सर्जन डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि अभी तक जो ऑपरेशन किए जाते थे। उसमें सबसे पहले आंख में दो इंजेक्शन लगाए जाते थे। आंख के अंदर ऊपर और नीचे ये इंजेक्शन लगाए जाते थे। इंजेक्शन आंख का हिस्सा सुन करने के लिए लगाए जाते थे। इंजेक्शन के 15 से 20 मिनट बाद ही ऑपरेशन किए जाने की प्रक्रिया शुरू होती है।
ऑपरेशन के दौरान चीरे के लिए ब्लेड का भी प्रयोग किया जाता और ऑपरेशन प्रक्रिया हाथ से होती थी। अब मरीज को आई ड्रोप डालकर सुन किया जाएगा और तुरंत ही फेको मशीन से ऑपरेशन किया जा सकेगा। बाजार में मशीन से यह ऑपरेशन कराने पर 25 से 30 हजार रुपये का खर्च आता है जबकि जिला अस्पताल में ये ऑपरेशन नि:शुल्क किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पहले जो ऑपरेशन किया जाता था, उसे ब्लॉक लगाकर हाथ से किया जाने वाला ऑपरेशन बोला जाता था। इसमें ऑपरेशन के बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती रखा जाता था। कम से कम दो दिन मरीज को अस्पताल में ही रहना पड़ता था।
मशीन से होने वाले ऑपरेशन के तुरंत बाद ही मरीज को छुट्टी मिल जाएगी। बताया कि जिला अस्पताल में अब अति आधुनिक फेको मशीन से मोतियाबिंद के ऑपरेशन शुरू किए गए हैं। इसमें सुन करने के लिए न तो इंजेक्शन लगाने की जरूरत है और न ही चीरा या टांकों की जरूरत पड़ती है।