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Etawah News: बाहर न खेलना और अकेलापन ले जा रहा मोबाइल के करीब

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इटावा। कल तक जो अंगुलियां स्कूल की कॉपियों पर भविष्य उकेरती थीं, आज उन्हीं अंगुलियों को मोबाइल गेम की लत ने अंधकार की ओर धकेल दिया है। गाजियाबाद में तीन बहनों का नौवीं मंजिला इमारत से कूदकर जान देना इसका उदाहरण माना जा सकता है। आउटडोर गेम व अपनों से दूरी से बच्चे मोबाइल की लत का शिकार हो रहे हैं। इसकी मुख्य वजह माता-पिता के कामकाजी व और सिंगल परिवार का होना है। यह कहना है जिला अस्पताल में तैनात मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ श्वेता यादव का।
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उन्होंने बताया कि उनके पास रोजाना दो से तीन मामले मोबाइल एडिक्शन (मोबाइल की लत) के आ रहे हैं। अभिभावकों से पूछने पर पता चला कि बच्चे के अधिक रोने पर वह शुरुआत में मोबाइल दे देते हैं। इससे बच्चे ने रोना बंद कर दिया और वह अपना काम आसानी से कर पाते थे। अब बच्चे को मोबाइल पर गेम खेलने की आदत हो गई है। गेम जीतने पर वह बहुत खुश होता है। दिन भर में वह छह से आठ घंटे मोबाइल पर व्यस्त रहता है। मोबाइल लेने या डांटने पर खाना छोड़ देता या घर में रखे चीजें तोड़ने लगता है।
कई बार समझाने पर वह मानता नहीं है। बताया कि पहले संयुक्त परिवार हुआ करते थे। इसकी वजह से बच्चे दादा-दादी या अन्य परिवार के सदस्यों के साथ घर या बाहर खेलते थे। अब आउटडोर बिल्कुल बंद हो गए हैं। बच्चों की मोबाइल पर दुनिया सिमट गई है जो उनके लिए खतरनाक साबित हो रही है।
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- एक साल पहले भरथना क्षेत्र एक किशोर ने गेम में हथियार खरीदने के लिए अपनी मां के जेवर तक गिरवी रख दिए थे। परिजनों को जब पता तो उसे डांटा। इससे उसने घर छोड़ दिया और बाद में रेलवे ट्रैक के पास संदिग्ध अवस्था में मिला।
- शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में पढ़ाई छोड़कर दिन-भर कमरे में बंद रहने वाले एक बच्चे ने जब मोबाइल छीने जाने पर खुद को चोट पहुंचाई। बाद में परिजन उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास लेकर गए तो पता बच्चा एडिक्शन का शिकार हो चुका है।
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- गेम जीतने की खुशी में दिमाग में निकलने वाला रसायन बच्चों को इसका गुलाम बना देता है।
- असल जिंदगी में पहचान न मिलने पर बच्चे गेम के लेवल में अपनी बहादुरी तलाशते हैं।
- बच्चा मोबाइल में व्यस्त है तो परेशान नहीं करेंगे, यही सोच अभिभावकों पर भारी पड़ रही है।
- देर रात तक जागना और अकेले कमरे में रहना।
- स्वभाव में अचानक चिड़चिड़ापन या आक्रामकता।
- पढ़ाई से पूरी तरह दूरी बना लेना।
- मोबाइल छीनने पर हिंसक प्रतिक्रिया देना।

- बच्चों के मोबाइल के लती पर उन्हें पहले प्यार से समझाएं।
- बच्चों को डांटे नहीं और मोबाइल बिल्कुल भी देना बंद न करें।
- बच्चों को मोबाइल देखने के लिए समय निर्धारित कर दें।
- बच्चों को मोबाइल की जगह बाहर के गेम खिलाएं।
- अभिभावक बच्चों के साथ समय बिताएं।
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लें।
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