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ग्रंथ नहीं, जीवन दर्शन है रामचरित मानस

Thu, 20 Aug 2015 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है, भगवान अवतार लेकर पापियों का विनाश करते हैं। पाप और पुण्य का संतुलन सही रखने के लिये ही देशभर में कई कथावाचक कथाओं और भजन के माध्यम से सनातन धर्म का संदेश देते हैं। रामचरित मानस एक ग्रंथ न होकर जीवन दर्शन है, जिसमें जीवन की हर कठिनाई का समाधान है।
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कस्बा ऊसराहार के उत्तम उत्सव धाम में आयोजित श्रीराम कथा के छठवें दिन अयोध्या से पधारे संत गोपालानंद जी महाराज ने रामकथा की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर जिस पर कृपा करते हैं, उसके हृदय में रामचरित प्रकट होता है।

उसके जीवन के हर संशय का दमन हो जाता है। वर्तमान में समाज की हर व्यवस्था बिगड़ रही है। ऐसे में शस्त्र और शास्त्र दोनों की जरूरत है। रामकथा में राम विवाह की कथा को विस्तार देते हुए कहा कि दहेज नहीं मांगा जाना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि राम और शंकर के विवाह में भी दहेज मिला था, परंतु मांगा नहीं गया था।
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यही प्रथा विकसित करनी होगी। राम के साथ उनके चारों भाईयों का विवाह भी जनकपुर में ही किया गया था। भरत का विवाह मांडवी से, लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से, शत्रुघ्न का विवाह श्रुतिकीर्ति से किया गया।

इस मौके पर विवाह उत्सव का आयोजन किया गया। राम बारात भी निकाली गई। झांकियों के माध्यम से रामसीता विवाह मंडप में संपंन हुआ। इस मौके पर ओमजी, बालगोविंद गुप्ता, अभिलाख  सिंह, विष्णुदेव बबलू वर्मा भी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने भागवताचार्य का अभिनंदन किया।
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