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नए नोट की नहीं भरपाई

Sat, 19 Nov 2016 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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ग्राम कुड़रिया में धान की ढेरी के पास बैठे किसान। - फोटो : अमर उजाला
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पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बंद होने से किसान परेशान हैं। धान की फसल की कटाई को मशीन वालों को देने के लिए उनके पास नए नोट नहीं हैं। उनका अनाज नहीं बिक पा रहा है। थोड़ी बिक्री हो भी रही है तो लोग पुराने नोट देने की शर्त रख देते हैं।
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      किसानों के खेतों में धान की फसल कटने के लिए खड़ी है। इन दिनों धान की फसल को काटने के लिए पंजाब और हरियाणा से कई कटर मशीन लेकर डेरा डाल देते हैं। वे 300 से 350 रुपये प्रति बीघा लेकर एक मशीन से हर रोज 50- 60 बीघा धान की फसल की कटाई कर लेते हैं। इस समय कई मशीनें क्षेत्र में हैं लेकिन किसान धान की फसल की कटाई नहीं करा पा रहा है। उनके पास मशीन वालों को भाड़ा देने के लिए नई करेंसी नहीं है। मशीन वाले भी पुराने 500 और 1000 के नोट नहीं ले रहे हैं। जिन किसानों ने जुगाड़ से फसल कटा ली वह मंडी में उसे बेचने नहीं जा पा रहे हैं। उनकी उपज को मंडी में कम दामों में खरीद जा रहा है। जहां हफ्ता 10 दिन पूर्व धान 1150 से 1200 रुपये क्विंटल बिक रहा था। वहीं अब धान 1075 से 11 सौ रुपये क्विंटल खरीदा जा रहा है। खरीदार आढ़तिया किसानों को भुगतान में पुराने नोट देेने की शर्त रख रहे हैं।
ग्राम कुड़रिया के किसान रज्जन तिवारी ने कहा कि नोट बंदी से मंडी में आढ़तियों की मनमानी चल रही है। ग्राम जयमलपुर निवासी बबलू अग्निहोत्री ने कहा कि धान की कटाई लेट होने से गेहूं की बुवाई भी देर से होने की आशंका है। पहले नए रुपये लेने के लिए दिनभर लाइन लगाएं फिर फसल कटाएं। ग्राम कुड़रिया के किसान संतोष त्रिपाठी की धान की फसल काटने के बाद दरवाजे पर रखी है। भाव नहीं मिलने से फसल बोरों में भरवा कर रख दी है।
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