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Etawah News: मानकों में उलझे रहे अधिकारी, नहीं हुई आलू की खरीदारी

Wed, 05 Apr 2023 11:38 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इटावा। मौसम की मार और आलू के भाव गिरने से परेशान किसानों को राहत दिलाने के लिए जिले में खरीद केंद्र तो खोला गया लेकिन रस्म अदायगी के बाद बंद कर दिया गया। अफसर मानकों के फेर में उलझे रहे और एक पैकेट आलू की खरीद नहीं हुई। जबकि नौ अप्रैल तक केंद्र खोलने के निर्देश हैं। केंद्र के बाहर लगा बैनर तक गायब है। प्रभारी मंडी सचिव किसानों के रुचि न दिखाने की बात कह रहे हैं।
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प्रदेश सरकार ने आलू का वाजिब भाव दिलाने के लिए 17 मार्च से खरीद केंद्र खोलने के निर्देश दिए थे। नई मंडी में केंद्र खोलने के लिए जगह तो चिह्नित कर ली गई लेकिन इसे खोलने में नियम आड़े आ गए। दरअसल, मंडी समिति के अधिकारियों को यह स्पष्ट नहीं हुआ कि आलू खरीद के समय बोरी किसान से लेनी है या फिर उन्हें उपलब्ध करानी है। इसे लेकर शासन से भी कोई स्पष्ट दिशा निर्देश न होने की बात जिम्मेदारों ने कही। हाल यह हुआ कि दिन बीतते गए और खरीद केंद्र को सिर्फ रस्म अदायगी के लिए ही खोला जाता रहा। एक भी किसान से यहां आलू नहीं खरीदा गया।
मंडी समिति ने आलू किसानों का भुगतान करने के लिए रामनगर स्थित स्टेट बैंक की शाखा में खाता भी खुलवा लिया। आलू का समर्थन मूल्य 650 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ। कुछ किसानों ने आलू बेचने की इच्छा भी जताई लेकिन उन्हें वापस कर दिया गया। बुधवार को खरीद केंद्र पर दोपहर एक बजे ही ताला लटका मिला। बाहर लगा बैनर भी गायब था। जानकारी करने पर पता चला कि केंद्र बंद चल रहा है। अब जब किसानों ने आलू को स्टोर में भंडारित कर दिया तो खरीद की उम्मीद भी लगभग खत्म सी हो गई है। ऐसे में केंद्र खोलने या बंद रखने का औचित्य भी नहीं है।
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प्रभारी मंडी सचिव अनिल कुमार ने बताया कि खरीद केंद्र खोला तो गया लेकिन किसानों ने ही रुचि नहीं दिखाई। यही कारण रहा कि आलू खरीद केंद्र पर बोहनी नहीं हो सकी।
आढ़त पर गेहूं का भाव भरपूर, सरकारी केंद्रों से किसान दूर
इटावा। एक अप्रैल से खुले गेहूं खरीद केंद्रों में सन्नाटा पसरा है। पांच दिन बीतने के बाद बोहनी तक नहीं हुई है। शासन की ओर से तय समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव आढ़त पर मिलने से किसान सरकारी केंद्रों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। आढ़त पर उन्हें 75 रुपये प्रति क्विंटल अधिक मिल रहा है।
नई मंडी में चार खरीद केंद्र खोले गए हैं। केंद्रों के प्रभारी उमाशंकर साहू, नरेंद्र सिंह, सावन कुमार, अरविंद कुमार ने बताया कि अभी तक किसी भी किसान ने संपर्क नहीं किया है। गेहूं बेचने के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। मात्र 96 किसानों ने ही जिला खाद्य और विपणन विभाग में पंजीकरण कराया है।
वहीं आढ़तों पर किसानों की भीड़ है। मंडी में 27 मार्च से खरीद शुरू हो चुकी है। रोजाना करीब एक हजार क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि किसान सरकारी केंद्र की जगह आढ़तों पर ज्यादा विश्वास कर रहे हैं। इसके पीछे किसानों का तर्क भी है। गेहूं बेचने पहुंचे किसान रामदीन, शिवम, सर्वेश व भूप सिंह ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने से पहले कई औपचारिकता करनी पड़ती है। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद जब उपज लेकर पहुंचते हैं तो गेहूं में कमी बताई जाती है। समर्थन मूल्य 2125 रुपये है, जबकि आढ़त पर 2200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से गेहूं खरीदा जा रहा है। भुगतान भी आढ़त पर नकद हो रहा है।
क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए जनपद के 11 लाख 54 हजार किसानों को उपनिदेशक कृषि के किसान पोर्टल के माध्यम से संदेश भेजे जा रहे हैं। साथ ही ज्यादा से ज्यादा पंजीकरण कराने की अपील कर रहे हैं। जल्द ही क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद शुरू हो जाएगी। गेहूं की नमी का मानक 12 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने, कटौती कम किए जाने, टूटे और क्षतिग्रस्त गेहूं का मानक 20 प्रतिशत किए जाने को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। - लालमणि पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी।
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