सैफई। मेडिकल कॉलेज में गैस्ट्रो विशेषज्ञ न होने से पेट के मरीजों को कानपुर और आगरा तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
2016 में सैफई मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिले के साथ ही आसपास के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें विशेषज्ञों को दिखाने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। छह साल बाद भी यहां गैस्ट्रो के डॉक्टर नहीं हैं। इसके कारण पेट दर्द के गंभीर मरीजों को अन्य डॉक्टरों को दिखाना पड़ता है। लाभ न मिलने पर रेफर कर दिया जाता है।
शुक्रवार को ओपीडी में लगभग 1900 मरीज दिखाने आए। इनमें से लगभग 200 मरीज पेट दर्द के थे।
फिजिशियन ने अल्ट्रासाउंड लिखा
जसवंतनगर के नगला चेतराम निवासी राहुल ने बताया कि कई दिन से पेट में दर्द हो रहा था। इसलिए मेडिकल कॉलेज में दिखाने आए थे। यहां पता चला कि कोई गैस्ट्रो का डॉक्टर नहीं है। फिजिशियन ने अल्ट्रासाउंड लिख दिया है।
मरोड़ के साथ हुईं उल्टियां, विशेषज्ञ नहीं मिले
मेडिकल कॉलेज दिखाने आए गांव के सोनू यादव ने बताया कि कई दिनों से पेट में मरोड़ हो रही है। उल्टियां भी होने लगी हैं। पर्चा बनवाने के बाद पता चला पेट के मर्ज के विशेषज्ञ नहीं हैं। मेडिसन विभाग में एक डॉक्टर को दिखाया है।
चार साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त
सैफई मेडिकल कॉलेज में चार साल से रेडियोलॉजिस्ट का भी पद रिक्त है। इसके कारण अल्ट्रासाउंड, एमआरआई जांच के नाम पर औपचारिकता की जा रही है।
गैस्ट्रो के डॉक्टरों की कमी की वजह से मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पा रही है। रेडियोलॉजिस्ट का पद भरने के लिए लगातार विज्ञप्ति निकाली जा रही है। प्रयास है कि जल्द गैस्ट्रो के डॉक्टर और रेडियोलॉजिस्ट का पद भर सके। - प्रो./डॉ. एसपी सिंह, चिकित्साधीक्षक, सैफई मेडिकल कॉलेज