इटावा। जिला अस्पताल प्रशासन भले ही इन्फ्लूएंजा से निपटने के लिए तैयार होने की बात कहे लेकिन हकीकत कुछ और है। हालात ये हैं कि जुकाम की दवा और खांसी के सीरप अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदने पड़ रहे हैं। ऐसे में गंभीर स्थिति से कैसे निपटा जाएगा।
इन्फ्लूएंजा से मिलते लक्षण वाले मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। तीन दिन से जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ नजर आ रही है। बुधवार को 1310 मरीजों की ओपीडी हुई। इनमें खांसी, जुकाम और बुखार के ही मरीज ज्यादा रहे। कई मरीज दवा न मिलने के कारण निराश होकर लौट गए।
वैदपुरा के गांव नगला बलदेव से आए अनिल कुमार ने बताया कि उन्हें करीब डेढ़ माह से जुकाम है। गांव बिजपुरी खेड़ा में प्राइवेट दवा ली लेकिन आराम नहीं मिला। जिला अस्पताल के डॉक्टर ने पर्चे पर दवा लिखी। बताया कि एक बार तो अस्पताल से दवा मिल गई थी। अब बाहर से 460 रुपये में खरीदना पड़ा।
नई मंडी स्थित दुर्गानगर से वंदना देवी सात साल के बेटे कुलदीप की खांसी की दवा लेने आई थीं। डॉक्टर ने सीरप लिखा लेकिन अस्पताल में नहीं मिला। मेडिकल स्टोर पर दवा लेने गईं। बताया कि सीरप था, लेकिन दिया नहीं। बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ भी भेदभाव करते हैं, पर्चे पर मोहर लगी होने पर दूसरे डॉक्टर ने नहीं देखा।
भरथना से आए मोहित ने बताया कि पेट दर्द की दवा लेने आए थे। सीटी स्कैन कराना चाहते थे, लेकिन अव्यवस्था की वजह से लौटना पड़ा। अब प्राइवेट इलाज कराएंगे। बताया कि पिता के साथ आए थे, जिला अस्पताल आना बेकार रहा। समय बर्बाद हुआ और इलाज भी नहीं मिला।
सीएमओ ने किया आपदा वार्ड का निरीक्षण
इन्फ्लूएंजा को लेकर जिला अस्पताल के आपदा वार्ड में 24 बेड आरक्षित हैं। बुधवार को सीएमओ डॉ. गीताराम ने वार्ड का निरीक्षण किया। बताया कि अभी इन्फ्लूएंजा का कोई केस नहीं है। इटावा में जांच की व्यवस्था नहीं है। जांच लखनऊ या आगरा में होगी। सीएमओ ने बताया कि यह सामान्य लक्षण वाला वायरस है। खांसी, जुकाम और नाक बहती है। चिंता जैसी कोई बात नहीं है।
डरने जैसी कोई बात नहीं
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अजय शर्मा का कहना है कि अभी ऐसी नौबत नहीं आई है कि किसी मरीज को भर्ती कराना पड़ा हो। इन्फ्लूएंजा नार्मल फ्लू है। डरने जैसी कोई बात नहीं है, कोविड जैसी गाइड लाइन का पालन करना होगा। मास्क लगाएं और हाथ सैनिटाइज करें।
रोजाना चार-पांच बच्चे भर्ती हो रहे
बाल रोग चिकित्सक डॉ. शादाब आलम ने कहा कि इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन भी आती है। लेकिन यह प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध है। जिला अस्पताल में न होने की वजह वायरस के म्यूटेन में बदलाव है। रोजाना चार-पांच बच्चे भर्ती कर रहे हैं। इनमें इन्फ्लूएंजा नहीं हैं।