इटावा। समय के साथ हमने कृषि क्षेत्र में तकनीकी परिवर्तन को बढ़ावा नहीं दिया। किसानों को जागरूक नहीं किया। इसी कारण से हम पिछड़ते गए। लेकिन अब फिर से कृषि क्षेत्र पर सरकार का ध्यान गया है। इस क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति जन्म ले रही है। इसका प्रभाव पैदावार वृद्धि के रूप में जल्द ही दिखाई देगा।
यह बात जनता महाविद्यालय बकेवर के प्राचार्य प्रो. राजेश त्रिपाठी ने शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज में ‘स्वावलंबी भारत में कृषि तकनीकी की भूमिका’ विषय पर हुए सेमिनार में कही। उन्होंने कहा कि भारत शुरू से ही कृषि प्रधान और कृषि संपन्न देश रहा है। कृषि में विविधीकरण और कृषि आधारित उद्योगों के माध्यम से व्यापार में हमारी 30 से 32 प्रतिशत भागीदारी थी। मसाले, तेल और उत्तम क्वालिटी के सूती कपड़ों के हम निर्यातक थे।
अधिष्ठाता प्रो. एनके शर्मा ने कृषि इंजीनियरों से आग्रह किया कि कृषि में प्रयुक्त होने वाली नई तकनीकि किसानों तक जल्द से जल्द पहुंचाई जाएं। तभी एक स्वावलंबी भारत का निर्माण हो सकेगा। विभाग संगठन मंत्री तरुण बाजपेई ने कहा कि यदि भारत को जानना है तो विवेकानंद को पढ़ें, जिन्होंने हमारी भारतीय सनातन संस्कृति का परचम विश्व पटल पर लहरा दिया। बताया कि वर्तमान में युवा लगातार परिसरों से दूर होता जा रहा है। इस दूरी को भरने के लिए विद्यार्थी परिषद परिसर चलो अभियान चलाएगी।
डॉ. पीके माहेश्वरी ने कृषि क्षेत्र में आ रहीं नई तकनीक के विषय में विस्तार से बताया। कार्यक्रम में जिला प्रमुख डॉ. सुनील सेंगर, डॉ. हरिश्चंद्र, देवेंद्र सिंह, डॉ. आशीष, डॉ. अखिलेश भदौरिया, मनीष सहाय, डॉ. श्वेता दुबे, सुमित पाल, प्रियांशु सोनी आदि उपस्थित रहे। नगर अध्यक्ष मुहम्मद जावेद खां ने आभार व्यक्त किया।