नया कंप्यूटराइज्ड राशनकार्ड पाने का इंतजार अब खत्म होगा। अगले सप्ताह से अंत्योदय श्रेणी के कार्ड मिलना शुरू हो जाएंगे। पूर्ति विभाग के दफ्तर में इन दिनों बड़े पैमाने पर डाटा फीडिंग का काम चल रहा है। नगरीय क्षेत्र में 30 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 67 फीसदी राशनकार्ड प्रिंट किए जाने की स्थिति में पहुंच चुके हैं।
जिले में 3.11 लाख राशनकार्ड प्रचलन में हैं। सरकार इस बार कार्डधारक के ब्यौरे को अपडेट करते हुए नए कंप्यूटराइज्ड राशनकार्ड उपलब्ध कराने में जुटी है। इसी वजह से पुराने राशनकार्डों के प्रचलन को अब तक मान्य किया जा रहा है। इस डाटा अपडेशन में ऐसे राशनकार्ड समाप्त हो जाएंगे, जिनके एपिककार्ड यानि वोटर आईडी नहीं है।
नए कंप्यूटराइज्ड राशनकार्ड एपिक कार्ड के आधार पर ही जारी होंगे। राशनकार्ड में वहीं नाम अंकित होगा जो एपिककार्ड में दर्ज होगा। डाटा अपडेशन की यह प्रक्रिया अब समाप्ति की ओर है। ऐसे में अगले सप्ताह से सबसे पहले अंत्योदय श्रेणी के राशनकार्ड वितरित होने लगेंगे।
इसके बाद बीपीएल और फिर एपीएल श्रेणी के कार्ड प्रदान किए जाएंगे। जिले में प्रचलित राशनकार्डों में 1,90,399 एपीएल, 74,717 बीपीएल और 46082 अंत्योदय राशनकार्ड शामिल हैं। इसमें नगरीय निकाय क्षेत्र के करीब 90 हजार राशनकार्डों में 30 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र के 2.21 लाख राशनकार्डों में 67 प्रतिशत राशनकार्ड रेडी टू प्रिंट की स्थिति में हैं।
जाहिर है कि नगरीय क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में दो गुने से अधिक कार्डों को डाटा अपडेशन पूर्ण हो चुका है। नगरीय क्षेत्र में जो 89 हजार कार्ड प्रचलन में हैं, उनमें एपीएल के 81 हजार राशनकार्डों में से करीब 28 प्रतिशत, बीपीएल के करीब साढ़े 6 हजार राशनकार्डों में से करीब 60 प्रतिशत और अंत्योदल के करीब ढाई हजार राशनकार्डों में से करीब 70 प्रतिशत कार्डों का अपडेशन पूर्ण हो चुका है।
जो नगरीय क्षेत्र में प्रचलित कुल राशनकार्डों का करीब 30 प्रतिशत बैठता है। नगरीय क्षेत्र में अपडेशन कार्य की धीमी प्रगति के पीछे विभाग का कहना है कि एपिक कार्डों के मिलान में दिक्कतें पेर्श आइं। पूर्ति विभाग में यह कार्य वेंडर के माध्यम से कराया जा रहा है।
कई कंप्यूटरों पर डाटा फीडिंग हो रही है। अब जो कार्ड रेडी टू प्रिंट की स्थिति में पहुंच चुके हैं। उन पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। नगरीय क्षेत्र में यह डिजिटल सिग्नेचर क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी (एआरओ) या पूर्ति निरीक्षक के होंगे। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के कार्डों पर एडीओ पंचायत या बीडीओ करेंगे। अब तक डेढ़ हजार डिजिटल सिग्नेचर किए जा चुके हैं।