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नवरात्र आज से

Mon, 12 Oct 2015 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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शारदीय नवरात्र से एक दिन पहले शहर भर के देवी मंदिरों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। मंदिरों और घरों में दिनभर साफ सफाई के साथ ही बाजारों में पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ उमड़ी रही। मंगलवार को भोर से ही मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
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शंख, घंटे घड़ियालों की गूंज के साथ माता की आराधना शुरू हो जाएगी और देवी भक्त माता की भक्ति में लीन हो जाएंगे। पहले दिन भक्त मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा अर्चना करेंगे। सोमवार का पूरा दिन लोगों ने नवरात्र पूजा की तैयारियों में गुजारा। महिलाएं घर में पूजा स्थल की साफ सफाई में व्यस्त रहीं।

देवी भक्तों ने माता की आराधना के लिए चुनरी, नारियल, घट, धूप, कपूर, हवन सामग्री आदि की खरीददारी की। बाजार में सुबह से शाम तक खरीददारों की भीड़ रही। मंदिरों को फूल और झालरों से सजाया गया।
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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
चौगुर्जी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के महंत भुवनेश मिश्र के अनुसार सामान्य तौर पर मंगलवार के दिन घट स्थापना नहीं की जाती। इस बार नवरात्र मंगलवार से शुरू है इसलिए देवी भक्त अविजित मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं। ये मुहूर्त दोपहर 12:01 मिनट से 12:47 मिनट तक रहेगा।

इसके साथ ही अगले दिन बुधवार को सुबह आठ बजे तक परवा होने के चलते इस समय के बीच सुबह कलश स्थापना की जा सकती है। पहले दिन जौ बोई जा सकती है। महंत भुवनेश ने बताया की अभिषेक, शृंगार, आरती व भोग के बाद दुर्गा पाठ भी देवी भक्तों को अवश्य करना चाहिए।

कलश स्थापना की विधि
कलश स्थापना के लिए मिट्टी या धातु (पीतल व तांबा) के कलश में गंगाजल या जल भरकर एक हल्दी की गांठ, एक सिक्का, एक सुपारी, एक जायफर डाल दें। इसके बाद नारियल पर लाल कपड़ा लपेटकर रख दें।

मिट्टी या बालू में जौ बोकर कलश को दोनों हाथों में लेकर भगवती के चित्र के सामने रखकर मां भवानी के मंत्र का 27 बार उच्चारण कर कलश स्थापित करें। इसके अलावा भक्त ‘या देवी सर्व भूतेषुमातृ रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमों नम:’ मंत्र का 108 बार उच्चारण करें।
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