सैफई रिम्स के फार्मेसी कालेज में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते निदेशक ब्रिगेडियर टी प्रभाकर।
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इटावा। उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान सैफई में फार्मेसी कालेज ने क्यूरिकुलम डेवलपमेंट वर्कशाप आन च्वाइस वेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर निदेशक डा. (बिग्रेडियर) टी प्रभाकर ने कहा कि फार्मेसी के बिना चिकित्सा क्षेत्र की कल्पना करना असंभव है। उन्होंने कहा कि इसमें पेशेवर क्षेत्र की संभावनाओं के अतिरिक्त रिसर्च क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए जरूरी है कि समय समय पर फार्मा से संबंधित कोर्स का मूल्यांकन कर उन्हें वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाए।
कार्यशाला च्वाइस वेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के अंत में आए सुझावों से बी फार्मा कोर्स को और अधिक सुगम बनाया जा सकेगा। उन्होंने विशेषज्ञों को सुझाव दिया कि कोर्स क्यूरिकुलम में आवश्यकता के अनुरूप ही परिवर्तन एवं संशोधन होने चाहिए ताकि कोर्स की मूल अवधारणा पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव न पडे़े।
फार्मेसी कालेज के प्राचार्य देवेंद्र पाठक ने बताया कि फार्मेसी शिक्षा के दौरान फार्मेसी सिद्धांतों की समझ विकसित करना फार्मेसी स्टूडेंट्स के लिए जरूरी है। इस अवसर पर अपर निदेशक (प्रशासन) राधाकृष्ण सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डा. (ब्रिगेडियर) एसके गुप्ता, पैरामेडिकल कालेज की प्राचार्या कमला पाठक तथा फार्मेसी विभाग के फैकल्टी मेंबर डा. प्रवीण कुमार, डा. अमरेश गुप्ता, डा सत्यनारायण पटनायक, डा योगेश यादव आदि उपस्थित रहे। कार्यशाला को प्रो. अंकिता तिलक, योगेंद सरीन, डा निशा शर्मा, डा अजय कुमार गुप्ता, डा पवन गौतम, डा दर्पण कौशिक आदि ने संबोधित किया।