कैस्त गांव में आग की एक घटना में दो जिंदगियों को ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बचा लिया। मां-बेटी धुएं के चलते बेहोश हो गईं थीं। ग्रामीणों ने दीवार तोड़कर दोनों को बाहर निकाला। झुलसी मां-बेटी को सैफई रिम्स में भर्ती कराया गया है। अग्निकांड में इस गरीब परिवार का गृहस्थी का सामान राख हो गया है।
कैस्त गांव निवासी श्रीनाथ कहार गुरुवार की रात खाने-पीने के बाद परिवार सहित घर में सो गए। आधी रात को छोटी पुत्रवधू शशी ने देखा कि कमरे के बाहर आंगन का छप्पर जल रहा है। आग की लपटें उठतीं देख उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर ग्रामीण दौड़े और आग बुझाने में जुट गए।
तब तक आग की लपटों ने पूरे घर को घेर लिया था। एक कमरे में श्रीनाथ के बड़े बेटे सूरज सिंह की पत्नी रजनी देवी (40) और उनकी पुत्री निशा (17) लेटी थीं। दोनों आग में घिर गई और धुएं के कारण बेहोश हो गईं। परिवार के लोगों ने जब उन्हें बाहर नहीं देखा तो हड़कंप मच गया।
उन्होंने पड़ोसियों की मदद से कमरे की पीछे की दीवार तोड़कर दोनों को बाहर निकाला। रजनी और निशा गंभीर रूप से झुलसी मिलीं। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग में टीवी, पंखे, सिलाई मशीन, रजाई गद्दे आदि घरेलू सामान राख हो गया।
सूचना पर थाना प्रभारी देवेंद्र यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने मां-बेटी को सैफई रिम्स भेजा। बाद में एसडीएम हंसराज यादव व क्षेत्रीय लेखपाल गीतम सिंह यादव भी पहुंचे। उन्होंने परिवार को आर्थिक मदद का भरोसा दिया।