इटावा। पराली जलाने पर अंकुश लगाने और किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। डीएम शुभ्रान्त कुमार शुक्ल के निर्देश पर छह अधिकारियों की तीन टीमें गठित की गई हैं। बृहस्पतिवार को टीमों ने अभियान चलाकर उर्वरक के 14 नमूने एकत्र किए। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से गठित टीमें अपने आवंटित क्षेत्रों में भ्रमण कर पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखेंगी। साथ ही उर्वरक की दुकानों की जांच कर गुणवत्ता, निर्धारित मूल्य पर बिक्री और उपलब्ध स्टॉक का सत्यापन करेंगी। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए भी विशेष निगरानी की जाएगी। अधिकारियों को दुकानों पर उपलब्ध उर्वरक की मात्रा का पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक से मिलान करने के निर्देश दिए गए हैं। स्टॉक में अंतर मिलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
चकनगर और भरथना तहसील में जांच की जिम्मेदारी उप कृषि निदेशक सतीश कुमार और वरिष्ठ प्राविधिक सहायक उदय प्रताप सिंह को सौंपी गई है। इटावा और ताखा तहसील में जिला कृषि अधिकारी ओंकार सिंह तथा सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक कमलेश नारायण वर्मा निगरानी करेंगे। वहीं, सैफई और जसवंतनगर तहसील में जिला उद्यान अधिकारी श्याम सिंह और वरिष्ठ प्राविधिक सहायक शिवम को जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
ये टीमें उर्वरक विक्रेताओं की दुकानों का निरीक्षण कर अनियमितताओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना और पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करना है।