गुरुनानक की गद्दी के पांचवें गुरु अर्जुन देव साहिब का शहीदी दिवस गुरुद्वारा तेगबहादुर में मनाया गया। मानवता के लिए शहादत देने वाले गुरु अर्जुन देव से त्याग तथा सेवा की प्रेरणा ली। अखंड पाठ का आयोजन भी हुआ।
लंगर में छोले का प्रसाद तथा लस्सी का प्रसाद बांटा गया। इस मौके पर सेवादारों को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया है। कार्यक्रम मंे समिति के अध्यक्ष हरजीत सिंह कालड़ा ने कहा कि किसी भी समाज की कौम व कौम की तरक्की चार क्षेत्रों से की जाती है शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक।
उन्होंने बताया कि गुरु अर्जुन देव की सबसे बड़ी उपलब्धि थी गुरुग्रंथ साहब का संपादन। उन्हाेंने अमृतसर में स्वर्ण मंदिर का निर्माण कराके गुरुग्रंथ साहब को विराजमान किया। पंजाब की आर्थिक प्रगति के लिए नए नगरों का निर्माण कराया।
वे मानवता की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। इससे पूर्व मुख्यग्रंथी की अगवाई में एक माह से चल रहे सुखमनी साहब की लडी का समापन किया गया। इस अवसर पर छोले तथा लस्सी का प्रसाद वितरित किया गया। सरदार तरनजीत सिंह व गुरुबचन सिंह ने सेवादारों का सरोपा भेंट का स्वागत किया।