2.5 प्रतिशत मंडी शुल्क की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर उप्र उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश आह्वान पर बृहस्पतिवार को जनपद की चारों मंडियां बंद रहीं। व्यापार मंडल की ओर से तीन दिवसीय आंदोलन की घोषणा की गई है।
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अनंत अग्रवाल ने बताया कि अध्यक्ष श्याम बिहारी मिश्रा के मंडी शुल्क को समाप्त करने के प्रयास पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने देश से मंडी समितियों व मंडी लाइसेंस की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया।
लेकिन, प्रदेश सरकार ने 2.5% मंडी शुल्क को समाप्त नहीं किया। भाजपा का नारा एक देश, एक कानून फिर प्रदेश में दोहरा कानून क्यों। दोहरे कानून व 2.5% मंडी शुल्क समाप्त करवाने के समर्थन में पूरे प्रदेश में गल्ला मंडियों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
जिलाध्यक्ष अनंत अग्रवाल ने बताया कि 2.5% मंडी शुल्क की दर के कारण खाद्यान पर 50 रुपये प्रति क्विंटल, दलहन व तिलहन पर 100 रुपये से लेकर 125 रुपये प्रति क्विंटल, लहसुन पर 150 रुपये से लेकर 250 रुपये प्रति क्विंटल व आलू, प्याज पर 25 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मंडी शुल्क लग रहा है। ऐसे में किसान की फसल अप्रत्यक्ष रूप से सस्ती बिकती है। लिहाजा मंडी में चरम सीमा पर भ्रष्टाचार हो रहा है।
किसानों के हित में तथा भ्रष्टाचार समाप्त के लिए 2.5% मंडी शुल्क को समाप्त किया जाए। प्रदर्शन के दौरान मंडी के संरक्षक शिवनाथ सिंह यादव, जसवंतनगर के अध्यक्ष सत्य प्रकाश,
भरथना अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव, पुरानी गल्ला मंडी अध्यक्ष राप्रताप वर्मा, महामंत्री सदाशिव श्रीवास्तव, अरविंद यादव, जयवीर सिंह यादव, टेनी लाला, विशाल गुप्ता, विनोद महेश्वरी, सुशील महेश्वरी मौजूद रहे।