इटावा। मौसम की बेरुखी से शनिवार को नई मंडी पहुंचे किसानों की चिंता बढ़ गई। नई मंडी में शनिवार को किसान जब ट्रैक्टरों से मक्का लेकर आए, तब उन्हें कतई उम्मीद नहीं थी कि कुछ देर बाद उनकी फसल बारिश से भीग जाएगी।
दोपहर करीब साढ़े 12 बजे हल्की बारिश होते ही किसान और पल्लेदार मक्का को मोमिया से ढकने लगे। करीब आधा घंटे बाद बारिश बंद होते ही मौसम साफ हुआ, लेकिन कुछ देर बाद आसमान में दोबारा काले बादल देख किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देनें लगीं।
दोपहर करीब दो बजे करीब आधा घंटे हुई जोरदार बारिश के दौरान मोमिया से ढंकी मक्का की फसल भी भीग गई। आंखों के सामने फसल की बर्बादी देख किसानों के पास हाथ मलने के अलावा को रास्ता नहीं था। मक्का को फिर से सुखाना के अलावा उनकी रखवाली खासकर घुमंतु पशुओं से बचाव करने की नई चुनौती और हो गई है।
आढ़ती सतीश के अनुसार मंडी में करीब डेढ़ हजार क्विंटल मक्का आ रही है। इस समय मक्का का मूल्य 1800 रुपये क्विंटल है, लेकिन बारिश की वजह से मक्का की चमक फीकी पड़ जाने से फसल के दाम भी कम हो जाते हैं।
गांव लोहिया दौलतपुर से करीब 25 क्विंटल मक्का लेकर आए हंसराज ने बताया कि जब फसल सुखाने को डाली थी, लेकिन दोपहर में पहले हल्की बाद में तेज बारिश से पूरी फसल भीग गई। अब तो लागत मिलना मुश्किल हो रहा है। क्या करें समझ में नहीं आ रहा है।
गांव पचावली से आए उदयवीर ने बताया कि वह सुबह करीब 35 किंवटल मक्का लेकर आए थे। तब मौसम साफ था, फसल को फर्श पर डलवाकर सुखा रहे थे। दोपहर को हल्की बारिश होने पर मोमिया डलवाई थी, लेकिन दो बजे हुई तेज बारिश से मक्का डूब गई।