इटावा। धनतेरस की तरह ही अक्षय तृतीया का भी सराफा कारोबारियों को इंतजार रहता है। कोरोना ने पिछले साल की तरह इस बार भी अक्षय तृतीया पर सराफा कारोबार पर ग्रहण लगा दिया है। अक्षय तृतीय का पर्व 14 मई को है। कोरोना कर्फ्यू के कारण 17 मई तक दुकानें बंद रहेंगी। बीते साल भी लॉकडाउन के चलते अक्षय तृतीया पर सराफा बाजार बंद रहा था।
बीते एक दशकों के दौरान अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी की खरीद का चलन बढ़ा है। इसके चलते सराफा कारोबारी भी धनतेरस की तर्ज पर तृतीया की तैयारी करते थे। बीते साल लॉकडाउन के चलते ज्यादातर सराफ ने दुकानों से जेवर निकालकर घरों में रख लिए थे। घर से ही ग्राहकों को जेवरों की फोटो वाट्सएप पर भेजकर बिक्री कर रहे थे।
इस बार व्यापारियों को यह भी करने का मौका नहीं मिला। पहले तीन मई तक कर्फ्यू लगा, जो अब लगातार बढ़ता जा रहा है। फिलहाल 17 मई सुबह सात बजे तक कर्फ्यू है।
सराफा कारोबारी संदीप वर्मा ने बताया कि 20 अप्रैल के आसपास से कोरोना संक्रमण के कारण स्थितियां बिगड़ने पर व्यापारियों ने अक्षय तृतीया की तैयारियां धीमी कर दी थीं। पिछले साल लोगों में कोरोना के दौरान भी जेवर खरीदने की ललक थी, लेकिन इस बार ऐसा नजर नहीं आ रहा है। बड़ी तादाद में लोगों के बीमार होने और अपनों के निधन के कारण ऐसा हो सकता है।
लवेदी संवाद प्रतिनिधि के मुताबिक, अक्षय तृतीया पर सोने की खरीद करना शुभ माना जाता है।
इस बार भी यह पर्व कोरोना कर्फ्यू की भेंट चढ़ गया। कस्बा लखना में सराफा की सर्वाधिक दुकानें हैं। लखना, बकेवर, महेवा, अहेरीपुर, निवाड़ीकला, लवेदी, चकरनगर, हनुमंतपुरा तक के ग्रामीण सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदारी करने यहां आते हैं।
कस्बा के सराफा व्यवसायी अभिलाख सिंह ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू के चलते बाजार व दुकानें बंद हैं। जेवरों की बुकिंग कर चुके व्यापारियों को भी नुकसान हो रहा है। बाजार बंद होने से व्यापारियों को मंहगे दाम पर सोना-चांदी खरीदना पड़ा रहा है और बुकिंग कराने वालों को पुराने भाव में जेवर देना पड़ रहा है।