लायन सफारी में में एनीमल वेलफेयर एंड एनरीचमेंट कार्यशाला में तीसरे दिन शेरों को बाड़ों के पीछे गाड़े गए पोलों के पास छोड़ा गया। शेरों ने यहां जमकर उछल कूद की, जिससे साफ हो गया कि विदेशी प्रशिक्षकों की सलाह पर बाड़ों में की गई नई व्यवस्था शेरों के स्वास्थ्य के लिए प्रभावी साबित होगी।
तीसरे दिन लौंगलीट लॉयन सफारी लंदन के प्रशिक्षक मार्क किंग्सटन जोन्स व क्रिस्टोफर जॉन हेल्स के निर्देशन पर गीगो को बाड़े के पीछे उस सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया, जहां पर एक दिन पूर्व पोल व स्टील की रस्सियां लगाई गईं थी।
यहां इससे पूर्व किसी पोल पर मजबूत बैग कुछ ऊंचाई पर लटकाया गया था तो दूसरी जगह फुटबाल को हवा में इतना ऊंचा टांगा गया था कि शेर उसे उछलकर सिर्फ छू सकें। जैसे ही शेर गीगो को यहां छोड़ा गया, उसने बैग व फुटबाल के साथ उछल कूद शुरू कर दी। वह लगातार इनके साथ पसीना बहाता रहा।
यह देख प्रशिक्षकों के साथ सफारी प्रशासन भी खुश दिखाई दिया। क्योंकि पूर्व में गीगो यहां सिर्फ इधर उधर चहलकदमी ही करता था। प्रशिक्षकों का कहना था कि उनके द्वारा की गई नई व्यवस्थाओं को शेरों ने स्वीकार लिया है जो उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छा संकेत है।
कार्यशाला में लायन सफारी के उप निदेशक अनिल कुमार पटेल, सलाहकार डॉ. भुवा, सहायक वन संरक्षक नाथूराम सिंह, बायोलॉजिस्ट आरबी उत्तम, क्षेत्रीय वन अधिकारी एके मिश्रा, सोसाइटी फार कंर्जवेशन ऑफ नेचर के महासचिव डॉ. राजीव चौहान के अलावा लॉयन सफ ारी, कानपुर प्राणी उद्यान व लखनऊ प्राणी उद्यान के कीपरों ने भी हिस्सा लिया।