जिस प्रकार शरीर को भोजन, पानी एवं वायु की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार आत्मा का भोजन प्रभु चिंतन है। प्रभु की भक्ति के बिना मानव जीवन अधूरा है। यह बात गांव नगला अर्जुन में हो रही श्रीमद्भागवत कथा मेें संत युवराज महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि आज के युग में श्री कृष्ण के उपदेश हमें जीवन जीने की राह दिखाते है।
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य ही परमात्मा का दूसरा रूप है, क्योंकि सत्कर्म से मनुष्य परमात्मा में विलीन हो जाता है। हर मनुष्य को जीव जंतु पशु, पक्षियों में भी परमात्मा के दर्शन करने चाहिए। उन्होंने श्री कृष्ण जन्मोत्सव का मनोहरी वर्णन किया।
कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, भगवान को मानव रूप में जन्म लेकर अधर्मी, अत्याचारियों व पापियों का नाश करना पड़ता है। मुरली मनोहर योगी राज भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लेकर अत्याचारी शासक अपने सगे मामा कंस का वध किया।
साथ ही साथ कई अन्य अत्याचारियों को भी यमलोक पहुंचाया। आज के युग में श्री कृष्ण के उपदेश हमें जीवन जीने की सच्ची राह दिखाते है। भागवत कथा के दौरान हरीशचंद्र राजपूत एवं धनदेवी राजपूत के अलावा श्रीदेवी तथा तेज सिंह, लाल सिंह, सुग्रीव सिंह, श्याम सिंह, दुर्ग सिंह आदि मौजूद रहे। कथा संयोजक ने बताया कि 13 अप्रैल को इस कार्यक्रम में दूर दूर के संत महात्माओं तथा ग्रामीणों को प्रसाद ग्रहण के लिए आमंत्रित किया गया है।