लाखापुर माइनर की खांदी कटने से चितभवन गांव के करीब डेढ़ दर्जन किसानों के खेतों में लगी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। बताया जा रहा है कि यह खांदी दो दिन पहले ही बनाई गई है। किसान इंजन से पानी निकाल कर फसल बचाने की कवायद में लगे रहे।
दतावली नहर से ही लाखापुर माइनर निकली हुई है। इसी माइनर में लाखापुर कटरा के पास अचानक ख्ंादी कट गई। इस कारण बंबे का पानी खेतों की ओर निकल पड़ा। यह पानी ग्राम लाखापुर कटरा के किनारे से होता हुआ चितभवन के किसानों के खेतों में जाकर भर गया।
पानी गांव के बाहर बने विद्यालय की चहारदीवारी तक पहुंच गया। पानी के खेतों में भर जाने से गेहूं व सरसों की फसल जलमग्न हो गई है। चितभवन निवासी शिवनाथ, रामकिशन, राजाराम, सुधीर पांडेय, राजेंद्र मिश्रा, संदीप कुामर, प्रेमादेवी, सूर्यप्रकाश मिश्रा , संतोष मिश्रा, रामजीवन, अखिलेश, राजेश कुमार, अमरसिंह आदि ने बताया कि उनकी फसलें बर्बाद हो गई है।
बड़ी मुश्किल से बोई थी फसल
किसान रामजीवन का कहना रहा कि इस बार गेहूं की फसल की बुवाई करने में काफी परेशानियां उठानी पड़ी थी। क्योंकि नोटबंदी के कारण रुपया की जुगाड़ के लिए काफी जूझना पड़ा। फसल की बुवाई कर ली लेकिन बंबे के पानी ने पूरी फसल बर्बाद कर दी।
आस लगाई वह टूट गई
किसान संतोष मिश्रा ने बताया कि उनके परिवार की करीब 20 बीघा जमीन में बोई गई गेहूं की फसल चौपट हो गई है। उन्होंने बताया कि उनके व उनके भाई सूर्यप्रकाश क ी छह-छह बीघा और उनकी मां की नौ बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई थी। हल्की-हल्की पौध आना शुरू हुआ था मगर पानी भर जाने से पूरी फसल बर्बाद हो गई। ऐसे में सालभर के अनाज की व्यवस्था की आस टूट गई है।
दोबारा बुवाई क रना मुश्किल
किसान रामकरन का कहना रहा कि बंबे में खांदी होने से खेतों में पानी भर गया। फसलें बर्बाद हो गई। हालांकि गेहूं की दोबारा बुवाई हो सकती है मगर वह भी काफी मुश्किलभरी है। पहले तो खेतों से पानी निकालना पड़ेगा। फिर खेत को सूखने में समय लगेगा।
किसानों को दिया जाए मुआवजा
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मनोज कुमार त्रिपाठी मंजू का कहना रहा कि गांव के काफी किसान बंबा में खांदी कटने से प्रभावित है। उनकी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। उन्होंने इसके लिए नहर विभाग की लापरवाही को दोषी ठहराया और मांग की कि किसानों के हुए नुकसान का आंकलन कर उन्हें मुआवजा दिया जाए।