ऊसराहार( इटावा)। ताखा तहसील के कानूनगो और लेखपाल की मिलीभगत से ऊसराहारा बाजार से सटे मोहरी गांव की करीब तीन करोड़ कीमत की 23 बीघा जमीन भूमाफिया ने अपने नाम करा ली। करीब 25 साल से काबिज भूमाफिया ने कुछ हिस्से पर पक्का निर्माण शुरू करा दिया। जानकारी पर एसडीएम ताखा नंद प्रकाश मौर्य ने जांच की। तब फर्जीवाड़ा खुला। सोमवार को एसडीएम ने कब्जा हटवाकर फर्जीवाड़े में शामिल कानूनगो, लेखपाल और भूमाफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के तहसीलदार को निर्देश दिए।
एसडीएम नंद प्रकाश ने बताया कि मोहरी के ग्रामीण ने साक्ष्यों के साथ कब्जेदारी की शिकायत की थी। जांच में पाया गया कि बाजार से गांव तक जुड़े नाले की करीब 23 बीघा जमीन खतौनी में मोहरी गांव की रहीसा बेगम, नरेंद्र सिंह, उमेश चंद्र और सुबोध कुमार के नाम दर्ज है। पुराने अभिलेखों को खंगालने पर असलियत सामने आई है। मौका मुआयना करने पर पता चला कि जमीन के कुछ हिस्से पर पक्का निर्माण शुरू कर दिया गया। तहसीलदार को कब्जा हटवाकर फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराने के निर्देश दिए गए। एसडीएम के मुताबिक खंड विकास अधिकारी को इस जमीन पर नियमानुसार नाले की खुदाई शुरू करवाने के लिए कहा गया।
फाइलों के डिजिटलाइजेशन में किया गया था खेल
एसडीएम ने बताया कि वर्ष 2005 तक जमीन नाले के तौर पर दर्ज थी। इसी दौरान अभिलेखों को कंप्यूटरीकृत करने की प्रक्रिया शुरू हुई। तत्कालीन कानूनगो और लेखपाल ने कब्जेदारों से मिलकर उनके गाटे से सटे नाले की जमीन को खतौनी में उनके नाम अंकित कर दिया। शुरुआत में कब्जेदार जमीन को खेती के उपयोग में लेते रहे। बाजार से सटे होने की वजह से धीरे-धीरे इसका व्यवसायिक उपयोग शुरू किया। माफिया जमीन पर प्लाटिंग कर बेचने की फिराक में लग गए। एसडीएम का कहना है कि जमीन को किसी बैंक में बंधक रखकर लोन लेने की आशंका के मद्देनजर छानबीन की जा रही है। कोई भूखंड किसी और को बेचा गया है या नहीं, इसका भी पता लगाया जा रहा है।
जमीन की बाजार कीमत का सही मूल्यांकन कराया जा रहा है। कब्जा हटवाकर नाला निर्माण का निर्देश दिया गया है। मुकदमा दर्ज करवाकर फर्जीवाड़े में शामिल लोगों को जेल भिजवाया जाएगा।
नंद प्रकाश मौर्य, उप जिलाधिकारी ताखा।