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Etawah News: ई-बाजार में भी जमुनापारी बकरियां की होगी धमक

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इटावा। जमुनापारी बकरियों व भदावरी भैंसों के पालन की बात की जाए तो जिले का नाम प्राथमिकता में आता है। जमुनापारी बकरियों की मांग को देखते हुए इनकी बिक्री ई-बाजार के जरिए करने की तैयारी है। शासन की ओर से इनके पालन और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए बाइस ख्वाजा मार्ग स्थित प्रजनन केंद्र को 12 करोड़ का बजट भी दिया है।
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जिला जमुनापारी बकरियों का हब है। ये बकरियां सिर्फ शुष्क और गर्म क्षेत्रों में रह सकती हैं। यमुना चंबल के आसपास के गांवों में इन बकरियों का पालन किया जा रहा है। चकरनगर क्षेत्र यमुना किनारे बसा है। इसलिए यहां बहुतायत में बकरियों का पालन किया जाता है। लघु पशु विभाग के अपर निदेशक डॉ. एके वर्मा ने शनिवार को शहर में स्थित प्रजनन केंद्र व प्रशिक्षण केंद्र की व्यवस्थाओं को परखा। ऐसे ही प्रशिक्षण केंद्र लखनऊ में खोलने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिले की पहचान जमुनापारी बकरी और भदावरी भैंसों से है। इनके विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।ऐसी सुविधाओं को विकसित करने का प्रयास है कि बकरियों को ऑनलाइन बाजार में बेचने की व्यवस्थाओं शुरू हो। इससे पालकों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमतों का लाभ मिलेगा।


प्रदेश का पहला प्रशिक्षण केंद्र जिले में
बीते वर्ष प्रदेश का पहला भेड़-बकरी प्रशिक्षण केंद्र का बलराम सिंह चौराहे पर खोला गया था। इसका लाभ 535 से अधिक पशुपालक ले चुके हैं। अपर निदेशक ने बताया कि प्रजनन केंद्र के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। शासन से 12 करोड़ रुपये की धनराशि प्रजनन केंद्र के लिए स्वीकृत हुई है। इससे प्रजनन क्षेत्र की सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। प्रशिक्षण केंद्र की तरह भवन व कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इससे जमुनापारी बकरियों का पालन करने वाले किसानों को प्रशिक्षण के साथ अन्य आवश्यक सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा।
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अच्छे दुग्ध उत्पादन के साथ मीट की है विदेशों में मांग
यह बकरियां दुग्ध उत्पादन में मुफीद हैं। एक जमुनापारी बकरी डेढ़ से दो किलो दूध देती हैं। इस बकरी का दूध फायदेमंद बताया जाता है। विदेशों में इनका मीट काफी महंगा बिकता है। कद काठी ऊंची होने से इनका वजन भी अधिक होता है। जमुनापारी बकरी सुंदरता के साथ मीट के लिए भी अच्छी मानी जाती है। यहां की जमुनापारी हंसी तोतापरी बकरी तो अपनी खूबसूरती के कारण अधिक दामों पर बिकती है।

इन राज्यों के व्यापारी कर रहे निर्यात
चकरनगर क्षेत्र के बकरी व्यापारियों के अनुसार, जमुनापारी बकरियों को खरीदकर नागपुर, छिंदवाड़ा, केरला, लखनऊ, जोधपुर, मुंबई, महाराष्ट्र आदि के व्यापारी देश के अलावा अन्य देशों में निर्यात कर रहे हैं। उक्त व्यापारी आगरा व कानपुर जैसे शहरों में अपने निजी बकरी फार्म हाउसों से बकरियों की आपूर्ति करते हैं। व्यापारी क्षेत्र के पशुपालकों से बकरी खरीदकर विदेशों में निर्यात करते हैं।


जिले में पाली जा रहीं ढाई लाख बकरियां
सीवीओ डॉ. मनोज गुप्ता ने बताया कि जिले में तकरीबन ढाई लाख बकरियों का पालन किया जा रहा है। इसमें से एक लाख के करीब जमुनापारी बकरियां हैं। जमुनापारी बकरियों के पालन के मामले में चकरनगर और उदी क्षेत्र काफी आगे है। उन्होंने बताया कि प्रजनन केंद्र की सुविधाओं से पशुपालकों को सीधे रूप से लाभ मिलेगा। सितंबर से जिले में पशु गणना शुरू हो जाएगी ।


जमुनापारी बकरियों और भदावरी भैंस के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे, जिनमें से जमुनापारी बकरियों के प्रजनन केंद्र की व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए 12 करोड़ स्वीकृत किए गए है। इन बकरियों को ई-बाजार के माध्यम से बेचे जाने की योजना है। वहीं, बहुत जल्द भदावरी भैसों के केंद्र के लिए शासन से धनराशि प्राप्त होने की उम्मीद है।
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- डॉ. एके वर्मा, अपर निदेशक लघु पशु विभाग
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