सैफई। महोला स्थित केंद्रीय कारागार में धोखाधड़ी के मामले बंद बंदी की शुक्रवार दोपहर बीमारी के चलते मौत हो गई। तबीयत बिगड़ने पर जेल प्रशासन उन्हें आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के इमरजेंसी ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर कला निवासी कमलेश (62) 8 सितंबर को फ्रेंड्स कॉलोनी थाना पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय कारागार भेजा था। वह सिविल लाइन थाने में प्लॉट की खरीद-फरोख्त से जुड़े धोखाधड़ी के एक मामले में गवाह थे। इस मामले में कुल पांच लोग आरोपी थे, जिनमें से तीन की मृत्यु हो चुकी है। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे उनकी तबीयत बिगड़ने पर जेल प्रशासन उन्हें सैफई लेकर पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
दोपहर करीब एक बजे परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद पत्नी मीरा देवी, बेटे अमित आलोक समेत अन्य परिजन शवगृह पहुंचे। पत्नी ने बताया कि सोमवार को जेल में मुलाकात के दौरान पति की तबीयत ठीक थी। करीब एक महीने पहले भी उनकी तबीयत बिगड़ी थी और उन्हें आठ दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। परिजनों का आरोप है कि मशक्कत पूरी होने के बावजूद उनसे जेल में काम कराया जाता था।
उन्होंने समय पर उपचार नहीं मिलने और तबीयत बिगड़ने की सूचना पहले न देने का भी आरोप लगाया। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। केंद्रीय कारागार के अधीक्षक राजीव शुक्ला ने बताया कि बंदी हृदय रोग से पीड़ित थे। हार्ट अटैक से मौत होने की आशंका है।(संवाद)