ताखा। सरकारी जांच व्यवस्था में लापरवाही सामने आई है। जहां एक जिंदा व्यक्ति को कागजों में मृत घोषित कर उसका राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया। पीड़ित स्वयं अपने जीवित होने का प्रमाण दे रहा है फिर भी पिछले दो माह से उसका राशन कार्ड बहाल नहीं हो सका है।
नगला पछायगांव निवासी छविनाथ सिंह का पात्र गृहस्थी राशन कार्ड बना हुआ था। राशन कार्ड संख्या 216140572180 पत्नी मीरा देवी के नाम से जारी था। इसमें छविनाथ सिंह सहित परिवार के अन्य सदस्य जुड़े हुए थे। परिवार नियमित रूप से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन प्राप्त कर रहा था लेकिन पिछले दो माह से अचानक उनका नाम खाद्यान्न वितरण सूची से हटा दिया गया।
जब छविनाथ सिंह राशन लेने के लिए कोटेदार रामऔतार के पास पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनके राशन कार्ड के सभी सदस्यों के नाम सूची से काट दिए गए हैं। कारण जानने के लिए वह जनसेवा केंद्र पहुंचे जहां पोर्टल जानकारी सामने आई कि पूर्व में इस सदस्य का नाम डिलीट किया जा चुका है, कारण सदस्य की मृत्यु है। कुल मिलाकर छविनाथ सिंह को जीते जी सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था। इसी आधार पर पूरे परिवार के नाम राशन सूची से हटा दिए गए।
छविनाथ सिंह का कहना है कि उन्हें यह समझ ही नहीं आ रहा कि जब वह जीवित हैं तो उन्हें मृत कैसे दिखा दिया गया और बाकी सदस्यों का राशन क्यों बंद कर दिया गया। पीड़ित ने बताया कि उसके पास मात्र दो बीघा जमीन है। जिससे खेती-किसानी कर वह परिवार का पालन-पोषण करता है। ऐसे में राशन बंद हो जाने से परिवार के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। छविनाथ ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई है।
पूर्ति निरीक्षक सुजीत कुमार ने बताया कि राशन कार्ड की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि किस आधार पर छविनाथ सिंह को मृत दर्शाया गया और उनका नाम सूची से हटाया गया। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।