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ऐसे कैसे पूरा होगा गेहूं खरीद का लक्ष्य

Thu, 21 Apr 2016 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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पक्का तालाब स्थित खाद्य विभाग के खरीद केंद्र पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला
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सन्नाटे की जद में जकड़े केंद्रों पर गेहूं की सरकारी खरीद के लाले पड़े हुए हैं। गेहूं खरीद का पहाड़ सरीखा लक्ष्य कैसे पूरा होगा, इसे लेकर केंद्र प्रभारी पसोपेश में हैं। 20 दिन गुजरने के बाद एक फीसदी से भी कम खरीद हो पाई है। अब तक सिर्फ 46 किसानों का 188.7 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा सका है, जबकि खरीद के लिए की निर्धारित अवधि का एक माह से भी कम समय रह गया है।
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न्यूनतम समर्थन मूल्य 1525 रुपये प्रति क्विंटल पर गेहूं की सरकारी खरीद गत एक अप्रैल से शुरू हुई है। तब से अब तक गेहूं क्रय केंद्र सन्नाटे से जूझ रहे हैं। दूर- दूर तक किसान नजर नहीं आ रहे। केंद्रों पर टंगे समर्थन मूल्य के बोर्ड और तराजू सरकारी खरीद को मुंह चिढ़ाते दिख रहे हैं।


शासन ने इस बार जिले में गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य 46 हजार मीट्रिक टन निर्धारित किया है। इसके लिए खाद्य विभाग के छह, पीसीएफ के 41, यूपीएसएस के 32, यूपी एग्रो के तीन, कर्मचारी कल्याण निगम के चार व भारतीय खाद्य निगम के दो केंद्र निर्धारित किए गए हैं। 88 केंद्रों पर गेहूं खरीद की जानी है।
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हकीकत यह कि कोई भी खरीद एजेंसी अभी तक सैकड़ा का अंक नहीं छू पाई है। सर्वाधिक 84 मीट्रिक टन खरीद यूपीएसएस एजेंसी ने की है। दूसरे खाद्य विभाग 56.7 एमटी तथा पीसीएफ ने 48 एमटी गेहूं खरीद कर क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। शेष खरीद एजेंसियों ने अभी एक दाना भी गेहूं नहीं खरीदा है। क्रय केंद्रों पर पसरे सन्नाटे को लेकर प्रभारी खासे परेशान हैं।


पक्का तालाब स्थित खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर अब तक सिर्फ दो किसानों का 135 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है, यहां तैनात एसएमआई विवेक कुमार सायण का कहना है कि किसान केंद्रों का रुख ही नहीं कर रहे। गेहूं कहां से खरीदा जाए। अब लक्ष्य कैसे पूरा होगा। इस संबंध में शासन से जो भी दिशा निर्देश प्राप्त होंगे, उसके अनुरूप कदम उठाए जाएंगे।


खुले बाजार में मिल रहा बेहतर मूल्य- जिले की मंडियों में इन दिनों गेहूं का रेट 1500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। केंद्र प्रभारी बाजार के इस रेट को ही जिम्मेदार मान रहे हैं। आमतौर पर किसान अपने गांव के पास मंडियों में ही गेहूं बेच रहे हैं। इससे उनका भाड़ा बच रहा है। भले ही उन्हें समर्थन मूल्य से 25 रुपये कम का भाव मिल रहा है। प्रभारियों का मानना है कि जब खुले बाजार में रेट कम होंगे। तभी किसान क्रय केंद्रों का रुख करेंगे।


15 दिन तो व्यवस्था में गुजरे- गेहूं की खरीद भले ही पहली अप्रैल से शुरू हुई है, लेकिन क्रय केंद्रों का संचालन 15 अप्रैल के आसपास शुरू हो पाया है। इससे पहले केंद्रों पर न तो बारदाना मुहैया था और न ही धनराशि आवंटित की गई थी। गेहूं की सरकारी खरीद कम होने के पीछे एक वजह यह भी मानी जा रही है।


फूड कमिश्नर के निर्देश पर अब अप्रैल में छुट्टियों के दिन भी गेहूं केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे किसानों का राहत मिल सके। खुले बाजार रेट से सरकारी खरीद प्रभावित है। रही बात वारदाना और धनराशि की। यह दोनों जैसे ही उपलब्ध हुए, एजेंसियों को भेज दिए गए हैं।
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आरएन पाल, डिप्टी आरएमओ, इटावा।
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