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रविवार से शुरू होंगे होलाष्टक, मांगलिक कार्यों पर लगेगा ब्रेक

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निवाड़ीकला। रविवार से होलाष्टक शुरू होते ही सनातन धर्म के सभी मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा । आचार्यों के अनुसार होली तक कोई मांगलिक कार्य नहीं होगा। होलिका दहन के बाद इन कार्यों की फिर से शुरुआत हो जाएगी। आचार्य पंडित विनोद दुबे ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। भगवताचार्य रामजी पांडे ने बताया 22 मार्च से होलाष्टक लग जाएगा , वहीं होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्रदोष बेला 6:49 से 9 : 10 तक का है। 22 मार्च से 28 मार्च तक सभी मांगलिक कार्य बंद रहेंगे।
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क्या है होलाष्टक..... होलाष्टक का आशय है होली के पूर्व के आठ दिन हैं, जिसे होलाष्टक कहते हैं। धर्मशास्त्रों में वर्णित 16 संस्कार जैसे- विवाह, पुंसवन, नामकरण, चूड़ाकरण, विद्यारंभ, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, गृह शांति, हवन-यज्ञ कर्म आदि नहीं किए जाते। इन दिनों शुरू किए गए कार्यों से कष्ट की प्राप्ति होती है। इन दिनों हुए विवाह से रिश्तों में अस्थिरता आजीवन बनी रहती है अथवा टूट जाती है। घर में नकारात्मकता , अशांति, दु:ख एवं क्लेष का वातावरण रहता है।
यह है मान्यता
मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने अपनी तपस्या भंग करने का प्रयास करने पर कामदेव को फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि को भस्म कर दिया था। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते हैं, इनके भस्म होने के कारण संसार में शोक की लहर फैल गई। जब कामदेव की पत्नी रति द्वारा भगवान शिव से क्षमा याचना की गई, तब भगवान शिव ने कामदेव को पुनर्जीवन प्रदान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद लोगों ने खुशी मनाई। होलाष्टक का अंत दुल्हेंदी के साथ होने के पीछे एक पौराणिक कारण यह माना जाता है।
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