इटावा। हिंदी का विकास सामान्य जन के विकास से जुड़ा है। जब हम हिंदी की बात करते हैं तो उपेक्षित, साधनहीन लोगों के कल्याण की भी चर्चा करते हैं। ये बात देश के प्रख्यात आलोचक आलोक श्रीवास्तव ने इस्लामिया कॉलेज सभागार में हिंदी सेवा निधि की राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि सामान्य जन के जीवन का विकास सीधे हिंदी से जुड़ा है। पूर्व असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल अशोक मेहता ने कहा की आज वादकारी का हित सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने जो संकेत पिछले दिनों दिया था, उससे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। नेपाल सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील कुमार पोखरेल ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंधों को हिंदी ने मजबूत किया है। पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि हिंदी ने सामान्य जन की बात सर्वाधिक मुखरता से की है। उन्होंने तकनीकी भाषा के शब्दकोश को भी समृद्ध करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मेडिकल एसोसिएशन भोपाल के निदेशक डॉ. संदीप गुप्ता ने चिकित्सा क्षेत्र में हिंदी शब्दावली मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि जब तक शिक्षा का स्तर समान नहीं होगा, तब तक भाषा का सवाल सहज नहीं है। डॉ. विद्याकांत तिवारी ने कहा कि हिंदी की विकास यात्रा को लंबी दूरी तय करनी है। मुंबई से आए प्रख्यात रंगमंच निर्देशक विनोद गणात्रा ने कहा है कि बॉलीवुड ने हिंदी को बहुत लोकप्रिय बनाया है।
वरिष्ठ समीक्षक डॉ. रमाकांत शर्मा भिमानी हरियाणा ने कहा कि हिंदी का सहज बोधगम्य स्वरूप लोगों को आकृष्ट करता है। इससे पूर्व डॉ. कुश चतुर्वेदी ने निधि के संस्थापक न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त का भावपूर्ण स्मरण किया। स्वागत निधि के महासचिव प्रदीप कुमार व आभार न्यासी दिलीप कुमार एडवोकेट ने जताया। कार्यक्रम का संचालन न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्त व शोध संस्थान के कार्यकारी निदेशक राकेश गुप्त ने किया।