ऊसराहार थाना क्षेत्र के गांव लहाटिया में खेत में टूटे पड़े हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। चीख-पुकार सुनकर बचाने आए दो युवक भी करंट से गंभीर रूप से झुलस गए।
घटना से नाराज ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे अफसरों ने ग्रामीणों को किसी तरह समझा-बुझाकर शांत किया।
ऊसराहार थाना क्षेत्र के गांव लहाटिया निवासी राजेश जाटव (40) पुत्र घासीराम जाटव की बकरी बुधवार की रात करीब आठ बजे खेतों की ओर भाग गई। उसे ढूंढने निकला राजेश खेत में टूटे पड़े हाईटेंशन लाइन के तार की चपेट में आ गया। उसकी चीख-पुकार सुनकर खेतों पर मौजूद पड़ोसी गांव का अरविंद जाटव (32) पुत्र नाथूराम निवासी गपचिया दौड़कर पहुंचा।
उसे बचाने के चक्कर में वह भी तार की चपेट में आ गया और करंट से उसकी भी मौके पर मौत हो गई। इस बीच चीख-पुकार सुनकर उन्हें बचाने पहुंचे राजेश का भाई संतोष कुमार व संजीव कुमार भी करंट से झुलस गए। सूचना मिलने के बाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा।
एक साथ दो युवकों की मौत होने पर ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। घटना के लिए विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजे की मांग की। सूचना पर गुरुवार की सुबह एसडीएम ताखा सुरेशचंद्र शर्मा भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
पीछे छोड़ गए कच्ची गृहस्थी
हादसे में मरने वाले दोनों युवक कच्ची गृहस्थी छोड़ गए हैं। दोनों खेती व मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी मौत से परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
मृतक राजेश अपने पीछे पत्नी सहित तीन लड़की व तीन लड़के छोड़ गया है। अरविंद अपने पीछे तीन लड़की व दो लड़के छोड़ गया है। दोनों ही अगल-बगल के गांव लहाटिया और गपचिया में रहते थे। दोनों के ही बच्चे अभी नाबालिग हैं।
जेई का दावा, कटिया लगाने के चक्कर में हुआ हादसा
बिजली विभाग के अवर अभियंता गिरजाशंकर वर्मा का कहना था कि राजेश अपने घर के पास लगे 10 केवीए के ट्रांसफार्मर से कटिया डालकर अपने घर पर पंखा चलाने की कोशिश कर रहा था। गलती से एक तार उसने हाईटेंशन लाइन में जोड़ दिया और तभी यह हादसा हो गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में परिजनों ने खेतों से गुजरी हाईटेंशन लाइन के तार को काटकर जमीन पर गिरा दिया। दावा किया कि निरीक्षण में भी तार टूटा हुआ नहीं पाया गया, बल्कि कटा हुआ पाया गया है।
सरकार! कब बदले जाएंगे बिजली के तार
इटावा। मुख्यमंत्री का गृह जनपद होने के कारण इटावा को वीआईपी का दर्जा प्राप्त है। यहां पर 24 घंटे बिजली सप्लाई देने का भी सरकारी फरमान हैैै लेकिन इसके बाद भी सालों से जर्जर लाइनों में करंट दौड़ता आ रहा है।
शहर व कस्बों की बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए करोड़ो रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र भगवान भरोसे चल रहा है। गर्मी में यहां अक्सर जर्जर लाइनों से निकली चिंगारी किसानों की फसलों को जला डालती है। कई बार तो जान तक भी बन जाती है। इन लाइनों क ो कब बदला जाएगा, इसक ा जवाब कोई नहीं देता।
गौरतलब है कि जिले में रिस्ट्रक्चर एक्सीलेशन पावर डेवलपमेंट रिफार्म प्रोग्राम (आरएडीआरपी योजना) के अंतर्गत 48 करोड़ रुपये के कार्य हुए है। 10 करोड़ रुपये से भरथना टाउन की लाइनें तथा ट्रांसफार्मर तथा अन्य उपकरण बदले गए हैं।
इसी प्रकार इटावा में 38 करोड़ से काम कराया गया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी जर्जर तारों पर करंट दौड़ रहा है। सबसे ज्यादा खराब हालत ऊसराहार तथा चकरनगर क्षेत्र के गांवाें की है। यहां लाइनें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि लोड बढ़ते ही तार टूट जाते हैं।
गर्मी बढ़ने पर यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इसका खामियाजा अक्सर किसानों को भुगतना पड़ता है। हर साल लाखों रुपये की फसल भेंट चढ़ जाती है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत भी जिले को 122.38 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें विद्युतीकरण और विस्तारीकरण का ही काम होना है।
बिजली विभाग राज्य सरकार से भी फंडिंग की उम्मीद लगाए बैठा है। अधीक्षण अभियंता धनीराम मौर्य ने बताया कि जहां पर तार टूटता है, उसे बदल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पूरी लाइन बदलने के लिए विभाग के पास बजट नहीं हैं।
ऐसी कोई योजना भी नहीं है कि जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की जर्जर लाइनों को बदला जा सके। उन्होंने स्वीकारा कि कई इलाकों में लाइनें जर्जर हो चुकी हैं। कुछ क्षेत्राें में गार्डिंग भी कराई गई है। उन्होंने कहा कि तार टूटने से दुर्घटनाएं रोक ने के लिए विभाग की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।