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Etawah News: गोशालाओं के दावों पर भारी, खेतों की रखवाली

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इटावा/चकरनगर। छुटा गोवंश किसानों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि गोशालाएं गोवंशों से भरी हुई हैं जबकि किसानों का कहना है कि छुट्टा गोवंश उनकी फसलों को चट कर रहे हैं। गेहूं व सरसों की फसल को बचाने के लिए किसानों को कड़ाके की ठंड में लाठी-डंडे लेकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।
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चकरनगर क्षेत्र के मिटहटी गांव के किसान रामकुमार ने बताया कि बटाई पर नौ बीघा खेत लिया था। इसमें पांच बीघा में गेहूं व चार बीघा में सरसों की बोआई की थी। सर्दी में दिन-रात फसलों की रखवाली कर रहे हैं। तेंदुआ का भी डर रहता है। तमाम कवायद के बाद भी पांच बीघा गेहूं की फसल गोवंशों ने चट कर दी। इससे पैदावार तो दूर लागत निकालना भी मुश्किल होगा। रामकुमार के मुताबिक ऐसे में पूरी साल खाने के लिए अनाज भी उपलब्ध नहीं हो सकेगा।
इसी तरह नगला चोप निवासी किसान प्रेमसिंह ने बताया कि उन्होंने 20 बीघा सरसों की फसल बोई थी। इसमें लगभग सात हजार रुपये का खर्चा आया था। एक रात में ही लगभग 10 बीघा सरसों पूरी तरह से चौपट हो गई। इसके साथ ही नगला महानंद निवासी तेजसिंह की आठ बीघा सरसों को छुट्टा गोवंशों ने अपना आहार बना लिया। यह व्यथा जिले के इन तीन किसानों की नहीं है बल्कि छुट्टा गोवंशों की इस समस्या से जिले के 70 फीसदी किसान परेशान है।
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किसानों का कहना है कि कड़कड़ाती सर्दी में फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है, साथ ही बीहड़ क्षेत्र में तेंदुआ के हमले का डर बना रहता है। इससे स्वयं की रक्षा के लिए किसान अपने साथ कुल्हाड़ी रखते है।


गोशालाओं की संख्या- 70
संरक्षित गोवंश का लक्ष्य- 11,066
संरक्षित किए गए गोवंश- 16,685
नवंबर 2025 में संरक्षित किए गए गोवंश- 452

जिले में संचालित सभी गोशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश सरंक्षित किए जा रहे हैं। समय-समय पर अभियान चलाकर छुट्टा गोवंशों को पकड़वाया भी जाता है। फिर से अभियान चलाकर गोवंशाें को पकड़वाया जाएगा।
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डॉ. धर्मेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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