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सिर से ट्यूमर निकाल लौटाई दस साल के बच्चे की रोशनी

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-आपरेशन के बाद 10 वर्षीय बालक शिवगोपाल न्यूरोसर्जन एवं विश्वविद्यायल के कुलपति प्रो. डा. राजकुमार ? - फोटो : ETAWHA
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इटावा। सैफई विवि में कुलपति प्रो. नवनीत कुमार की टीम ने दस साल के शिवगोपाल के सिर पर ट्यूमर निकालकर उसके आंखों की रोशनी लौटा दी है।
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सीतापुर निवासी गंगाराम के दस साल के पुत्र शिवगोपाल को पिछले छह महीने से सिरदर्द की शिकायत थी। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होने के कारण उसका इलाज गांव के आसपास के अस्पतालों में कराया गया पर कोई आराम नहीं मिला। तीन महीने पहले उसके आंखों की रोशनी अचानक चली गई।
बच्चे को दिखाई नहीं पड़ने से परिजन सकते में आ गए। उसे तुरंत एसजीपीजीआई लखनऊ ले गए। जांच के बाद उसके दिमाग के नीचे के भाग में एक बडे ट्यूमर होने की जानकारी मिली।
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परिजनों ने दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों में भी दिखाया पर, बीमारी की जटिलता के मद्देनजर कोई भी आपरेशन को तैयार नहीं हुआ। मरीज के पिता गंगाराम को वहां बताया गया कि प्रो. (डा.) राजकुमार एक विश्वस्तरीय न्यूरो सर्जन हैं। ऐसे जटिल बीमारियों के सर्जरी में महारत हासिल है एवं वे एसजीपीजीआई, लखनऊ में ऐसे मरीजों का सफलतापूर्वक आपरेशन कर चुके हैं।
इस वजह से मरीज को चिकित्सा विश्वविद्यालय सैफई रेफर कर दिया गया। जहां उसे न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डा.) राजकुमार ने बताया कि बच्चे को नैसोफेरिंजियल एंजियोफाइब्रोमा नामक ट्यूमर था जो साधारणत: नाक के अंदर के हिस्से में पाया जाता है।
शिवगोपाल में यह ट्यूमर अति सक्रिय होकर इतना विशाल हो गया था कि दिमाग में आंख तक जाने वाली नसों को दबा रहा था। इससे उसके आंखों की रोशनी चली गई थी। इस ट्यूमर के दिमाग में फैलने से जान जाने का भी खतरा था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज का तुरंत आपरेशन किया गया। साधारणत: इस ट्यूमर का आपरेशन नाक से किया जाता है। लेकिन, डा. राजकुमार ने सिर का ऑपरेशन कर मस्तक के नीचे से ट्यूमर को पूर्णतया निकाल दिया। सर्जरी चार घंटे चली।
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डा. राजकुमार की टीम में डा. फहीम, डा. अहमद, डा. हनुमान, एनेस्थेसिक डा. जेबीएस एवं ओटी स्टाफ शामिल थी।
शिवगोपाल के पिता ने बताया कि वे हर तरफ से निराश एवं हताश हो चुके थे। डा. राजकुमार उनके लिए देवदूत साबित हुए और उनके बच्चे की जान बचाई।
चिकित्सा अधीक्षक डा. आदेश कुमार ने बताया कि इस प्रकार की विशिष्ट शल्यक्रिया सैफई विश्वविद्यालय में पहली बार किया गया है। ऐसे सर्जरी में महानगरों में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं, पर विश्वविद्यायल में यह नि:शुल्क किया गया।
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