ंगामे के बाद अस्पताल में बैठे पीड़ित परिजन। संवाद
- फोटो : ETAWAH
इटावा। डॉक्टर ने ऑपरेशन के बाद बच्चेदानी में टांके नहीं लगाए। महिला की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आगरा के अस्पताल ले गए तो लापरवाही का खुलासा हुआ। परिजनों ने निजी अस्पताल में जमकर हंगामा किया। पुलिस ने उन्हें शांत कराया।
भरथना क्षेत्र के नगला जवाहर निवासी साबिर कुमार ने पत्नी रीना को 25 जुलाई को आवास विकास कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। उसी रात महिला का ऑपरेशन हुआ और उसने बेटे को जन्म दिया। पांच दिन बाद डॉक्टर ने पेट में लगे टांके काट दिए और महिला की छुट्टी कर दी। तीन दिन बाद महिला का पेट फूलने लगा और दर्द होने लगा। इस पर परिजन उसे लेकर दोबारा अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने महिला को भर्ती कर लिया। तीन दिन हालत में सुधार न होने पर महिला की छुट्टी कर दी। एक सप्ताह बाद महिला की हालत फिर खराब हो गई। परिजन उसे लेकर फिर अस्पताल पहुंचे, जहां से आगरा के एक डॉक्टर के पास भेज दिया गया।
परिजन जब आगरा लेकर गए तो वहां डॉक्टर ने बताया कि महिला की बच्चेदानी खुली हुई है। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने बच्चेदानी में टांके नहीं लगाए हैं। इस कारण बार-बार तबियत खराब हो रही है। इससे गुस्साए परिजन गुरुवार दोपहर आवास विकास स्थित निजी अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। अस्पताल के स्टॉफ ने सिविल लाइन थाने में सूचना कर दी। थाना प्रभारी मोहम्मद कामिल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत कराया। वहीं, डॉक्टर ने परिजनों से एक दिन का समय मांगा है। थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित पक्ष से तहरीर मांगी गई है। तहरीर मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।