इटावा। जिला अस्पताल में टृ्रनेट मशीन से होने वाली कोरोना जांच की रिपोर्ट ओपीडी पर्चे पर लगने से ठगी का खेल चल रहा है। यहां मौजूद दलाली करने वाले उन लोगों को फांस कर निगेटिव जांच रिपोर्ट दिलवाने का झांसा देकर रुपये ऐंठ रहे हैं। जिन्हें तत्काल रिपोर्ट की दरकार रहती है। वायरल हुए दो वीडियो से इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट दर्ज करने के साथ पुलिस मामले की जांच कर रही है।
दरअसल, जून की शुरुआत से जिला अस्पताल में टृ्रनेट मशीन से कोरोना जांच हो रही है। इसमें अस्पताल प्रशासन की ओर से यह सुविधा दी गई है कि ओपीडी या इमरजेंसी से बने पर्चा पर रजिस्ट्रेशन कराकर जांच कराई जा सकती है। करीब घंटे भर में संबंधित व्यक्ति को उसी पर्चे पर पॉजिटिव या निगेटिव लिखकर दे दिया जाता है। दरअसल यह सुविधा उन गर्भवती महिलाओं या अन्य मरीजों के लिए है। जिन्हें ऑपरेशन अथवा अन्य इलाज से पूर्व कोरोना जांच रिपोर्ट लेना अनिवार्य है। इसी सुविधा का अनुचित फायदा अस्पताल में सक्रिय दलाल उठा रहे हैं। ऐसे लोगों की निगाहें अस्पताल में उन लोगों को टटोलती रहती हैं। जिनसे बगैर सैंपल और जल्द जांच रिपोर्ट का झांसा देकर रुपये ऐंठे जा सकें।
इन दलालों के दो वीडियो वायरल होने पर ठगी के इस मामले का खुलासा हुआ है। एक मामले में सिविल लाइन थाना के सिपाही से करीब सप्ताह भर पूर्व 500 रुपये ठग गए थे। उसके बाद एसएसपी के फालोअर से भी बिना जांच के कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट देने की बात कहते हुए 500 रुपये ऐंठे गए। पता चला कि दलाल लोग इसके एवज में दो हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। एक वीडियो डीएम आवास के पास का है जिसमें एक व्यक्ति निगेटिव रिपोर्ट लगाने के लिए पर्चा ले रहा। जबकि दूसरे वीडियो में पर्चे के भीतर रुपये रखने की बात कही जा रही है।
ठगी के इस खेल को लेकर जांच से जुड़े स्टाफ कर्मी सफाई दे रहे कि उनके स्तर से उसी पर्चे पर रिपोर्ट दी जाती है। जिसके ओपीडी या इमरजेंसी सेवा का यूएसआईडी नंबर टृ्रनेट मशीन में रजिस्टर्ड किया जाता है। इसे डिलीट नहीं किया जा सकता है। मशीन व रजिस्टर में एक समान नंबर दर्ज होते हैं। इनकी कभी भी जांच की जा सकती है। उसी पर्चे पर जांच रिपोर्ट के साथ दस्तखत व मुहर लगाकर दिया जाता है।
फर्जी ढंग से जांच रिपोर्ट का मामला संज्ञान में आया है। अस्पताल के पर्चे पर जांच रिपोर्ट देने के अलावा मशीन से एक स्लिप भी निकलती है। उससे भी जांच रिपोर्ट होने या न होने की पुष्टि की जा सकती है। हालांकि वह इस संबंध में विचार विमर्श कर कोई ऐसा हल निकालने का प्रयास करेंगे कि जिससे इस तरह की अनुचित गतिविधियों पर विराम लग सके।
डॉ. एसएस भदौरिया, सीएमएस, जिला अस्पताल