अर्की अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जा रही है।
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हौसला पोषण योजना जिले में फ्लाप साबित हो रही है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अफसरों पर दबाव बनाने का आरोप लगा मोर्चा खोल रखा है। उधर शासन ने एक सीडीपीओ और कई सुपरवाइजरों का तबादला कर दिया है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों के हित से जुड़ी योजना फिलहाल दम तोड़ती दिख रही है। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाएं और अति कुपोषित बच्चे भोजन, फल, दूध, दही, घी आदि से वंचित हैं। वहीं योजना से संबंधित रिपोर्टिंग का काम भी बाधित हो रहा है।
15 जुलाई को हौसला पोषण योजना जिले में लागू हुई है। शासन के निर्देश पर इसे आनन-फानन में शुरू किया गया। नतीजतन अभी तक यह योजना भलीभांति क्रियान्वित नहीं हो पाई है। शासन ने इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों को भोजन, फल आदि देने का फरमान जारी किया है। लेकिन यह फरमान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के गले नहीं उतर रहा। कार्यकत्रियों ने योजना को लेकर यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि बगैर रकम मिले योजना का जारी रखना मुमकिन नहीं है। उन्होंने विभागीय अफसरों पर दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है। उन्हाेंने आंदोलन का रुख पकड़ रखा है।
तीन दिनों से अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं। हौसला योजना की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
एक तरफ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां विरोध कर रही हैं तो दूसरी तरफ शासन ने सीडीपीओ व सुपरवाइजरों के तबादले कर दिए हैं। चकरनगर सीडीपीओ मनोज कुमार वर्मा और राज्य पोषण मिशन के प्रधान सहायक सैयद कमर अब्बास मुख्यालय पर योजना संबंधी रिपोर्ट का दायित्व निभा रहे थे। शासन ने उनका तबादला मुरादाबाद कर दिया। जबकि अब्बास छुट्टी पर चल रहे हैं। वर्तमान में 9 सीडीपीओ के स्थान पर सिर्फ 6 उपलब्ध हैं। भरथना और महेवा ब्लाक में योजना की मॉनीटरिंग एवं रिपोर्टिंग करने वाला कोई नहीं है। सुपरवाइजरों का भी यही हाल है। जिले में कुल 54 सुपरवाइजरों के पद सृजित हैं। लेकिन सिर्फ 21 से काम चलाया जा रहा था। हाल ही में शासन ने सैफई की सुपरवाइजर बिंदा देवी को अमेठी, बढ़पुरा की शशिकला का उन्नाव, चकरनगर की श्यामकली का कानपुर देहात, महेवा की अनुपमा श्रीवास्तव व जसवंतनगर की अर्चना श्रीवास्तव का भी अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया। ऐसे में चारों ओर से हौसला योजना के क्रियान्वयन में बाधा है।