इटावा। कन्नौज के छिबरामऊ में संचालित अवैध पटाखा फैक्टरी में मंगलवार को हुए विस्फोट में एक श्रमिक की मौत हो गई, जबकि पड़ोसी के घर की दीवारों में दरारें पड़ गईं। कन्नौज का हादसा भी जिले के लिए सबक नहीं बन सका है। शहर के ग्वालियर हाईवे पर धूमनपुरा गांव में आबादी के बीच पटाखों की दुकानें अब खतरा बनी हुई हैं। यहां भी अगर विस्फोट होता है तबाही मचेगी।
धूमनपुरा के पास ही शहर का ऐतिहासिक कालीवाह मंदिर हैं। यहां नवरात्र के दिनों में शहर समेत आसपास क्षेत्र व जिलों के लाखों की संख्या भक्त हर रोज आते हैं। नवरात्र के दिनों में सुबह से लेकर देर शाम तक यहां श्रद्धालुओं भी भीड़ लगी रहती है। साथ ही जगह-जगह भंडारे का संचालन होता है। ऐसे में आतिशबाजी की दुकानों से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को खतरा हो सकता है। अग्निशमन विभाग ने इस ओर अभी तक ध्यान नहीं दिया है।
एक पखवाड़ा पहले जांच में क्षमता से अधिक मिला था भंडारण
डीएम की ओर से गठित टीम ने करीब एक पखवाड़ा पहले धूमनपुरा स्थित पांच आतिशबाजी दुकानों की जांच की तो सभी में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। किसी दुकान पर लाइसेंस की क्षमता से अधिक पटाखों का भंडारण मिला तो कहीं दुकान के साथ ही घर में आतिशबाजी का स्टॉक रखा मिला। एक दुकान पर तो लाइसेंस की क्षमता से करीब 10 गुना अधिक आतिशबाजी का स्टॉक मिला था। टीम में सदर एसडीएम, सीओ सिटी समेत सीएफओ ने छापा मारकर जांच की थी। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई के लिए डीएम को लिखा था।
जांच के दौरान दुकानदार नहीं चला पाए थे अग्निशमन यंत्र
जांच के दौरान टीम ने दुकानदारों से अग्निशमन उपकरणों को चलाकर दिखाने को कहा। इस पर कोई भी दुकानदार उपकरणों का संचालन नहीं कर सका। टीम के पूछने पर दुकानदार संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। टीम ने अग्निशमन विभाग को दुकानदारों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए थे। इससे आग लगने की स्थिति में सुरक्षा की जा सके।
11 साल पहले गाड़ीपुरा से धूमनपुरा स्थानांतरित की गई थी दुकानें
अग्निशमन विभाग ने साल 14-15 में शहर के गाड़ीपुरा में संचालित आतिशबाजी की दुकानों को रिहायशी इलाके से हटाकर आबादी क्षेत्र के बाहर धूमनपुरा में कर दी गई थी। इस दौरान यहां दुकानों के आसपास कुछ नहीं था। इन 11 सालों में काफी परिवर्तन हो गया है। धीरे-धीरे यहां निर्माण कार्य चलते रहे। वर्तमान में आतिशबाजी पटाखा दुकानों के पास कई मकान बन गए। साथ ही लोगों ने दुकान, शोरूम व फैक्टरी खोल ली। धीरे-धीरे यहां निर्माण कार्य बढ़ रहा है। इससे आने वाले दिनों में आतिशबाजी दुकानों से खतरा बढ़ेगा।
पिछले सालों में पटाखा विस्फोट से हुई घटनाएं-
-साल 2021 कस्बा भरथना में राधा मोहन के पटाखा विस्फोट से आग लग गई थी। सूचना पर पहुंची अग्निशमन टीम ने काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया था। इसमें टीम बाल-बाल बच गई थी।
-28 फरवरी को शहर के विष्णु हरिपुरम में अवैध पटाखा गोदाम में आग लगने से हड़कंप मच गया था। इस दौरान पास के स्कूल से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
कब-कब पुलिस ने पकड़े अवैध पटाखे-
-अक्तूबर 2023 में पुलिस ने अवैध पटाखा फैक्टरी का भंडाफोड़ कर भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री (जैसे मैग्नीशियम और लोहे का चूर्ण) जब्त करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
-अक्तूबर 2025 (दिवाली से पूर्व) पुलिस ने अवैध आतिशबाजी के खिलाफ अभियान चलाकर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से 60 हजार रुपये के अवैध पटाखे और विस्फोटक सामग्री पकड़ी थी।
वर्जन-
धूमनपुरा में कुछ लोगों ने पटाखा दुकानों के पास आवास व दुकानें बना ली हैं, जो गलत है। आतिशबाजी की स्थायी दुकानों का पांच साल में नवीनीकरण होता है, इस दौरान आबादी क्षेत्र में आने वाली दुकानों को आबादी क्षेत्र से बाहर दुकान ले जाने पर ही लाइसेंस दिया जाएगा। साथ ही समय-समय पर दुकानदारों का निरीक्षण कर सुरक्षा उपकरणों के बारे में जानकारी दी जाती है।
-सत्येंद्र कुमार पांडेय, सीएफओ।