asiatic lion of gir national park
- फोटो : gujrattourism
इटावा सफारी पार्क के वेटनरी अस्पताल में तीन माह से जिंदगी और मौत के बीच झूल रही शेरनी ग्रीष्मा के लकवाग्रस्त पैरों में पहली बार हरकत देखी गई। इससे ग्रीष्मा के एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद जगी है।
शेरनी ग्रीष्मा तीन जुलाई को कैनाइन डिस्टेंपर संक्रमण की चपेट में आ गई थी। इससे उसके आधे धड़ को लकवा मार गया और कूल्हे के साथ पिछले दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया। तीन माह से अधिक समय बीत चुका है और ग्रीष्मा लगातार निढाल होकर सफारी के ब्रीडिंग सेंटर के बाडे़ में पड़ी है। कैनाइन डिस्टेंपर का संक्रमण कितना घातक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस संक्रमण की चपेट में आया जानवर एक दो माह में ही दम तोड़ देता है। लेकिन सफारी में दिन रात की विशेष देखभाल के बाद मंगलवार को ग्रीष्मा के स्वास्थ्य में चमत्कारिक परिवर्तन देखा गया। सूत्रों के अनुसार एक दो दिनों से ग्रीष्मा के बेजान पैरों में फिर से हरकत देखी गई है। शरीर पर गहरे जख्म होने के बाद भी ग्रीष्मा ने पिछले पैरों पर वजन देने क ा प्रयास शुरू कर दिया है। यही नहीं एक दो बार उसे पिछला पैर जमीन से ऊपर की ओर उठाए भी देखा गया। इससे सफारी प्रशासन और डाक्टरों की टीम को ये उम्मीद जाग गई है कि हो सकता है ग्रीष्मा अपने पैरों पर फिर से खड़ी हो सके। सफारी प्रशासन ने ग्रीष्मा की देखरेख और बढ़ा दी है।